पश्चिम एशिया तनाव का असर: एशियाई बाजारों में गिरावट, कच्चा तेल 109 डॉलर के पार

Business & Economy April 28, 2026 By Bharat B. Malviya
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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध को लेकर चल रही कूटनीतिक वार्ताओं में रुकावट का असर अब वैश्विक बाजारों पर साफ दिखने लगा है। तेल आपूर्ति के सबसे अहम मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावित रहने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिसके चलते एशियाई शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई है।

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मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जून डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 1.11 डॉलर बढ़कर 109.34 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं जुलाई अनुबंध वाला ब्रेंट क्रूड भी 102 डॉलर के पार चला गया। अमेरिकी क्रूड भी बढ़कर करीब 97 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है। यह उछाल उस समय आया है जब युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी, जो अब अस्थिरता के बीच काफी ऊपर पहुंच चुकी है।

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ऊर्जा कीमतों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर एशियाई शेयर बाजारों पर पड़ा है। जापान का निक्केई 225 इंडेक्स करीब 1.1 प्रतिशत गिर गया, जबकि हांगकांग का हैंग सेंग 0.7 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 0.2 प्रतिशत नीचे रहा। ऑस्ट्रेलिया के बाजार में भी गिरावट दर्ज की गई, हालांकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ अपवाद रहा।

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विशेषज्ञों का मानना है कि महंगे तेल के कारण उत्पादन लागत बढ़ेगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ी हुई है और बाजार में दबाव देखने को मिल रहा है।

इस बीच जापान के केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर को 0.75 प्रतिशत पर स्थिर रखा है, लेकिन उसने साफ संकेत दिया है कि महंगे तेल और पश्चिम एशिया के हालात आर्थिक वृद्धि को धीमा कर सकते हैं।

अमेरिकी बाजारों में हालांकि मिला-जुला रुख देखने को मिला। एसएंडपी 500 ने मामूली बढ़त के साथ नया रिकॉर्ड स्तर छुआ, जबकि डाउ जोंस में हल्की गिरावट दर्ज की गई और नैस्डैक में थोड़ी तेजी रही। वहीं बॉन्ड बाजार में भी हलचल देखी गई और 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 4.33 प्रतिशत तक पहुंच गई।

अब निवेशकों की नजर इस सप्ताह होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंकों की बैठकों और बड़ी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और तेल की आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी रह सकती है।

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