देश की अर्थव्यवस्था के लिए एक चिंताजनक संकेत सामने आया है। Union Bank of India की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2026 में भारत की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर (IIP) घटकर करीब 2 प्रतिशत तक रह सकती है। यह फरवरी 2026 के 5.2 प्रतिशत के मुकाबले बड़ी गिरावट मानी जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस गिरावट की मुख्य वजह विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और ऊर्जा क्षेत्र में आई कमजोरी है। बढ़ती लागत, आपूर्ति में बाधाएं और मांग में कमी ने उत्पादन पर सीधा असर डाला है। खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मार्च में घटकर 53.9 पर आ गया, जो जून 2022 के बाद सबसे निचला स्तर है।

औद्योगिक उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत योगदान देने वाले आठ प्रमुख बुनियादी ढांचा क्षेत्रों का प्रदर्शन भी कमजोर रहा। मार्च में इन सेक्टर्स में 0.4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो पिछले 19 महीनों का सबसे खराब प्रदर्शन है। कोयला, कच्चा तेल, उर्वरक और बिजली उत्पादन में गिरावट ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।

हालांकि, कुछ सेक्टर्स में हल्की राहत भी देखने को मिली। प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, इस्पात और सीमेंट के उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा, जीएसटी संग्रह में वृद्धि और ई-वे बिल जेनरेशन जैसे संकेतकों ने खपत में सुधार के संकेत दिए हैं।
वाहनों की बिक्री के आंकड़े भी मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। दोपहिया और ट्रैक्टर की बिक्री में अच्छी बढ़त दर्ज हुई है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मांग स्थिर बनी हुई है। वहीं, यात्री वाहनों की बिक्री की रफ्तार थोड़ी धीमी हुई है।
ईंधन खपत के मामले में भी मिलाजुला रुझान देखने को मिला। पेट्रोल और डीजल की मांग बढ़ी है, लेकिन विमान ईंधन की खपत में गिरावट आई है, जिसका कारण उड़ानों में कमी बताया जा रहा है।
कुल मिलाकर, रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय औद्योगिक गतिविधियों की रफ्तार फिलहाल दबाव में है। हालांकि कुछ सेक्टर मजबूती दिखा रहे हैं, लेकिन व्यापक स्तर पर सुधार के लिए मांग और उत्पादन दोनों में संतुलन जरूरी होगा।