पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और Strait of Hormuz में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। शुक्रवार को वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की बढ़त देखने को मिली।

वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 107 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी बढ़कर लगभग 97.6 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।

📈 क्यों बढ़ीं कच्चे तेल की कीमतें?

तेल बाजार में यह तेजी मुख्य रूप से इन कारणों से आई है:
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
होर्मुज जलडमरूमध्य में सप्लाई बाधा की आशंका
समुद्री परिवहन में अनिश्चितता
निवेशकों की बढ़ती चिंता
हालांकि अमेरिका की ओर से युद्धविराम की घोषणा की गई है, लेकिन बाजार में अस्थिरता बनी हुई है और निवेशक सतर्क रुख अपना रहे हैं।
🌍 होर्मुज क्यों है इतना अहम?
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है।
वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है
इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है
सैन्य गतिविधियों और जहाजों की आवाजाही में बाधा से बाजार में घबराहट बढ़ जाती है
📊 घरेलू बाजार में क्या हाल?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद घरेलू वायदा बाजार MCX पर कच्चे तेल में हल्की गिरावट देखी गई।
एमसीएक्स पर कीमत करीब 1% (लगभग 100 रुपये) गिरकर
👉 9,077 रुपये प्रति बैरल के आसपास रही
📉 साप्ताहिक आधार पर बड़ा उछाल
अगर पिछले सप्ताह से तुलना करें तो:
ब्रेंट क्रूड में लगभग 18.83% की बढ़त
WTI में करीब 17% का उछाल
यह संकेत देता है कि बाजार भू-राजनीतिक जोखिमों को गंभीरता से ले रहा है।
🧠 विशेषज्ञों की राय
कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार:
निकट अवधि में तेल का रुख सतर्क तेजी वाला बना रह सकता है
99 डॉलर के ऊपर मजबूती टिकने पर ब्रेंट
👉 104.50 से 110 डॉलर तक जा सकता है
गिरावट की स्थिति में 95 डॉलर अहम सपोर्ट माना जा रहा है
🌐 वैश्विक तनाव का असर बाजार पर
इस बीच Donald Trump ने स्पष्ट किया है कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियार का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। हालांकि क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
वैश्विक तनाव का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखा, जहां सेंसेक्स और निफ्टी में शुरुआती कारोबार के दौरान लगभग 1% की गिरावट दर्ज की गई।
📌 निष्कर्ष
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। यदि स्थिति और बिगड़ती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक देखने को मिलेगा।