देश में किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य दिलाने और कृषि व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एक ओर जहां छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर फसलों की खरीद तेज कर दी गई है, वहीं बिहार में पहली बार दालों की संगठित खरीद शुरू की गई है।

यह पहल खास तौर पर दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से की गई है। सरकार का मानना है कि इससे किसानों को न सिर्फ उनकी फसल का बेहतर दाम मिलेगा, बल्कि बाजार में दालों की उपलब्धता और कीमतों में भी संतुलन बना रहेगा।

बिहार की बात करें तो यहां आत्मनिर्भर दलहन मिशन के तहत पहली बार मसूर दाल की संगठित खरीद शुरू की गई है। यह राज्य के किसानों के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है, क्योंकि पहले उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए निजी व्यापारियों पर निर्भर रहना पड़ता था।

सरकार ने 22 अप्रैल 2026 तक बिहार में लगभग 32,000 मीट्रिक टन मसूर खरीदने का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (NCCF) और नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (NAFED) अहम भूमिका निभा रहे हैं।
अब तक इस योजना के तहत 16 पीएसीएस और एफपीओ को जोड़ा जा चुका है। करीब 59 किसानों को इससे लाभ मिला है और 100 मीट्रिक टन से ज्यादा मसूर की खरीद भी पूरी की जा चुकी है। आने वाले समय में इस खरीद को और बड़े स्तर पर बढ़ाने की तैयारी है।
वहीं छत्तीसगढ़ में भी पीएम-आशा योजना के तहत MSP पर खरीद को मजबूत किया गया है। राज्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को जोड़ा जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी आई है।
इस समय धमतरी, दुर्ग, रायपुर, रायगढ़ और बालोद जैसे कई जिलों में खरीद प्रक्रिया जारी है। साथ ही सरकार जल्द ही अन्य जिलों में भी इसे विस्तार देने की योजना बना रही है।
राज्य में करीब 85 पीएसीएस केंद्र सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं और किसानों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाए जा रहे हैं।
सरकार का कहना है कि इन कदमों से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा, बिचौलियों की भूमिका कम होगी और कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही यह पहल देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करने में मदद करेगी।