भारतीय पूंजी बाजार तेजी से बदलते दौर से गुजर रहा है और इसमें अब एक नई डिजिटल पीढ़ी की एंट्री हो रही है। इस बदलाव को लेकर Securities and Exchange Board of India (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि जैसे-जैसे बाजार में तकनीक से जुड़ी नई पीढ़ी शामिल हो रही है, वैसे-वैसे नियामकों की जिम्मेदारी भी पहले से अधिक बढ़ जाती है।

सेबी के 38वें स्थापना दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि संस्था की सबसे बड़ी ताकत उसकी विश्वसनीयता है, जो वर्षों से किए गए सुधारों, मजबूत नियामकीय ढांचे और निवेशकों के भरोसे पर आधारित है। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय बाजारों ने मजबूती दिखाई है, जो देश की आर्थिक क्षमता और नीतिगत स्थिरता को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि भारत का पूंजी बाजार पिछले कुछ दशकों में पूरी तरह बदल चुका है। पहले जहां ट्रेडिंग सिस्टम सीमित और पारदर्शिता कम थी, वहीं अब बाजार पूरी तरह तकनीक आधारित, रियल-टाइम और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बन चुका है। डीमैट व्यवस्था, स्क्रीन-बेस्ड ट्रेडिंग, रोलिंग सेटलमेंट और बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस जैसे सुधारों ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है।

कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने भी साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में किसी बड़े स्टॉक एक्सचेंज या वित्तीय संस्थान पर साइबर हमला पूरे बाजार को प्रभावित कर सकता है। इससे निवेशकों की पूंजी को भारी नुकसान हो सकता है और बाजार में भरोसा कमजोर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकें साइबर हमलों को और अधिक तेज, जटिल और बड़े पैमाने पर सक्षम बना रही हैं। ऐसे में नियामकों और वित्तीय संस्थानों को अपनी सुरक्षा प्रणाली को लगातार मजबूत करना होगा।
सेबी प्रमुख ने यह भी बताया कि भारत के पूंजी बाजार का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। देश में 5900 से अधिक सूचीबद्ध कंपनियां हैं और 14 करोड़ से ज्यादा निवेशक बाजार से जुड़े हुए हैं। पिछले एक दशक में बाजार पूंजीकरण में लगातार वृद्धि हुई है और म्यूचुअल फंड उद्योग भी तेज गति से विस्तार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि नई डिजिटल पीढ़ी के निवेशक पहले से अधिक जागरूक, तेज और तकनीकी रूप से सक्षम हैं। ऐसे में जरूरी है कि नवाचार को बढ़ावा दिया जाए, लेकिन साथ ही निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता से कोई समझौता न हो।
आने वाले समय की प्राथमिकताओं पर बात करते हुए पांडे ने कहा कि सेबी नियमों को सरल बनाने, कारोबार को आसान करने और तकनीक आधारित निगरानी को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है। डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल फोरेंसिक और एआई जैसे आधुनिक उपकरणों के जरिए संस्था अपनी क्षमता को और बढ़ा रही है।
उन्होंने अंत में कहा कि किसी भी संस्था की असली पहचान उसके वर्षों से नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता से होती है। यही विश्वास भारत के पूंजी बाजार को भविष्य में और मजबूत बनाएगा और वैश्विक स्तर पर उसे अग्रणी स्थान दिलाएगा।