गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह और दिल्ली के नेब सराय इलाके से भारी मात्रा में प्रतिबंधित नशीली गोलियां बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने विशेष अभियान के तहत करीब 182 करोड़ रुपये मूल्य की खेप जब्त की है। मामले में सीरियाई मूल के एक विदेशी नागरिक को गिरफ्तार किया गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह खेप खाड़ी देशों में तस्करी के लिए भेजी जानी थी। बरामद नशीला पदार्थ कैप्टागोन नाम से जाना जाता है, जिसे दुनिया के सबसे खतरनाक कृत्रिम मादक पदार्थों में गिना जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नशीले पदार्थ को सबसे पहले मानसिक और तंत्रिका संबंधी बीमारियों के इलाज के लिए विकसित किया गया था, लेकिन बाद में इसके खतरनाक असर और लत लगाने वाली प्रवृत्ति के कारण कई देशों ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया। अब अवैध प्रयोगशालाओं में इसे अलग-अलग रासायनिक पदार्थों को मिलाकर तैयार किया जाता है।
इसका सेवन करने वाला व्यक्ति लंबे समय तक जाग सकता है, उसे थकान और भूख कम महसूस होती है तथा शरीर में अचानक ऊर्जा बढ़ने लगती है। हालांकि इसके दुष्प्रभाव बेहद गंभीर बताए जाते हैं। यह नशा व्यक्ति को आक्रामक, हिंसक और मानसिक रूप से अस्थिर बना सकता है। लंबे समय तक इस्तेमाल से मानसिक संतुलन पर गहरा असर पड़ने का खतरा रहता है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नशीले पदार्थों की तस्करी से मिलने वाला पैसा संगठित अपराध और चरमपंथी नेटवर्क तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि भारत में इसकी पहली बड़ी बरामदगी को बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला माना जा रहा है।

