पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिला, जहां Rashtriya Swayamsevak Sangh और Bharatiya Janata Party की लंबे समय से चली आ रही रणनीति ने आखिरकार बड़ा परिणाम दिया। राज्य में भाजपा की ऐतिहासिक जीत और Mamata Banerjee की हार के पीछे RSS की जमीनी तैयारी को अहम वजह माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में RSS ने दूसरे राज्यों से करीब 2,000 पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं को पश्चिम बंगाल भेजा। इन कार्यकर्ताओं का मुख्य काम गांवों, कस्बों और शहरी इलाकों में घर-घर जाकर लोगों से संपर्क बनाना था। उन्होंने महिलाओं, युवाओं, छात्रों और अलग-अलग समुदायों के बीच छोटे-छोटे समूहों में बैठकों का आयोजन किया।

RSS और भाजपा ने चुनाव से पहले बेहद सूक्ष्म स्तर पर काम किया। हर विधानसभा क्षेत्र के लिए विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें स्थानीय मुद्दे, मतदान का इतिहास, विपक्षी नेताओं की ताकत और कमजोरियां तक शामिल थीं। भाजपा नेताओं के मुताबिक यह रणनीति पूरी तरह डेटा आधारित थी।
संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने माना कि 2021 के बाद उन्हें यह भरोसा हो गया था कि तृणमूल कांग्रेस को चुनौती दी जा सकती है। इसके बाद RSS और भाजपा के बीच तालमेल और मजबूत किया गया। राज्य में संगठन को संभालने की जिम्मेदारी अनुभवी रणनीतिकारों को दी गई, जिन्होंने लगातार जमीनी नेटवर्क को मजबूत किया।
RSS नेताओं का दावा है कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस सरकार की नीतियों, खासकर “तुष्टिकरण की राजनीति”, ने भाजपा के लिए माहौल तैयार किया। संगठन का कहना है कि बंगाल में हिंदू मतदाताओं के बीच असंतोष बढ़ रहा था, जिसे भाजपा ने राजनीतिक समर्थन में बदलने का काम किया।

इसके अलावा, RSS ने शिक्षा और सामाजिक संगठनों के जरिए भी अपनी पकड़ मजबूत की। संगठन से जुड़े स्कूलों और सामाजिक अभियानों के माध्यम से ग्रामीण और शहरी इलाकों में लगातार संपर्क बनाए रखा गया।
इस चुनाव में भाजपा की जीत को सिर्फ राजनीतिक अभियान नहीं, बल्कि वर्षों की संगठनात्मक तैयारी और जमीनी रणनीति का नतीजा माना जा रहा है। बंगाल की राजनीति में यह बदलाव आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
