देश में डिजिटल कंटेंट का दायरा तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी बढ़ते जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत में करीब 2.5 करोड़ एक्टिव यूट्यूब चैनल्स हैं, जिनमें से केवल लगभग 30 लाख को ही प्रोफेशनल माना जा सकता है। बाकी बड़ी संख्या में ऐसे चैनल्स हैं जो बिना किसी नियमन के काम कर रहे हैं और कई मामलों में गलत या कॉपी-पेस्ट कंटेंट फैला रहे हैं।

YouTube अब केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रहा, बल्कि लोग इसे डॉक्टर, वकील, मैकेनिक और फिटनेस ट्रेनर तक के विकल्प के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। देश में हर महीने लगभग 50 करोड़ एक्टिव यूजर्स इस प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। यही वजह है कि यहां दी गई जानकारी का असर सीधे लोगों की जिंदगी पर पड़ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, देश में हर 10 में से 7 लोग यूट्यूब पर दी गई सलाह पर भरोसा करते हैं, जबकि इनमें से करीब 60% लोग बिना किसी जांच-पड़ताल के उसे सही मान लेते हैं। ऐसे में गलत जानकारी या अधूरी सलाह गंभीर नुकसान का कारण बन सकती है।

हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां यूट्यूब पर दी गई सलाह जानलेवा साबित हुई। तमिलनाडु के कृष्णगिरी जिले में एक दंपती ने प्रसव के दौरान यूट्यूब वीडियो के आधार पर ‘होम डिलीवरी’ की कोशिश की, जिससे महिला की मौत हो गई। इस मामले में Madras High Court ने टिप्पणी की कि कुछ यूट्यूब चैनल केवल व्यूज और सब्सक्राइबर्स बढ़ाने के लिए खतरनाक कंटेंट परोस रहे हैं, जो समाज के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
एक अन्य मामले में ‘बाप ऑफ चार्ट’ नाम से चैनल चलाने वाले मो. नासिरुद्दीन अंसारी निवेश संबंधी सलाह देते थे, जबकि जांच में सामने आया कि वे खुद भारी घाटे में थे। Securities and Exchange Board of India ने उन्हें निवेशकों से अवैध रूप से जुटाई गई राशि लौटाने का आदेश दिया, लेकिन इस पूरे मामले में प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी।
इससे पहले Supreme Court of India भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका पर सवाल उठा चुका है। कोर्ट ने कहा था कि ये प्लेटफॉर्म केवल ‘मध्यस्थ’ नहीं हैं, बल्कि इनके एल्गोरिद्म तय करते हैं कि कौन-सी जानकारी तेजी से फैलेगी, इसलिए इनकी जवाबदेही तय की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या से निपटने के लिए सख्त नियमों की जरूरत है। डिजिटल कानून विशेषज्ञ विराग गुप्ता के अनुसार, यूट्यूब चैनल्स को टैक्सपेयर के रूप में रजिस्टर किया जाना चाहिए, ताकि उनकी जवाबदेही तय हो सके।
उन्होंने सुझाव दिया कि यूट्यूब और फेसबुक जैसी कंपनियों को केवल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि मीडिया कंपनियों की तरह देखा जाना चाहिए। इनके डेटा कारोबार पर जीएसटी लगाने, यूजर बेस के आधार पर टैक्स तय करने और शिकायत निवारण अधिकारियों की जानकारी सार्वजनिक करने जैसे कदम जरूरी हैं।
फिलहाल, भारत में डिजिटल कंटेंट का विस्तार तेजी से हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही गलत जानकारी और बिना जिम्मेदारी के कंटेंट का खतरा भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यूजर्स की सतर्कता और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही, दोनों ही बेहद जरूरी हो गए हैं।