लोकसभा ने मंगलवार (17 मार्च 2026) को विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन रद्द कर दिया। यह फैसला ध्वनि मत से पारित प्रस्ताव के जरिए लिया गया, जिसे संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में पेश किया।

यह प्रस्ताव तब लाया गया जब कांग्रेस के मुख्य सचेतक के. सुरेश ने कुछ सदस्यों द्वारा हुई "अनजाने में चूक" के लिए खेद व्यक्त किया और सदन के सुचारू संचालन में सहयोग का आश्वासन दिया।

समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव और एनसीपी (एसपी) की सुप्रिया सुले ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों की जिम्मेदारी है।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस दौरान कहा कि संसद को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक “लक्ष्मण रेखा” तय करना जरूरी है, जिसका सभी को पालन करना चाहिए।
📌 क्या है पूरा मामला?
3 फरवरी को बजट सत्र के पहले चरण के दौरान अनुशासनहीन व्यवहार के आरोप में सात कांग्रेस सांसदों और एक CPI(M) सांसद को निलंबित कर दिया गया था।
निलंबित सांसदों में गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडेन, सी. किरण कुमार रेड्डी, अमरिंदर सिंह राजा वारिंग, मानिकम टैगोर, प्रशांत पाडोले, डीन कुरियाकोस (कांग्रेस) और एस. वेंकटेशन (CPI-M) शामिल थे।