राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख Mohan Bhagwat ने कहा है कि हिंदू समाज में एकता की कमी देश के बार-बार गुलाम होने की बड़ी वजह रही है। उन्होंने यह बात तेलंगाना के निजामाबाद जिले के कंडाकुर्थी गांव में श्री केशव स्फूर्ति मंदिर के उद्घाटन के दौरान कही, जो Keshav Baliram Hedgewar का पैतृक स्थान माना जाता है।

अपने संबोधन में भागवत ने कहा कि हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना केवल एक संगठन बनाने के लिए नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और देश को विदेशी शासन से मुक्त कराने के उद्देश्य से की थी। उनके अनुसार, हेडगेवार का मानना था कि भारत की कमजोरी केवल बाहरी आक्रमण नहीं, बल्कि आंतरिक विघटन भी रहा है।

भागवत ने कहा कि आजादी के संघर्ष के दौरान हेडगेवार ने अलग-अलग तरीकों से ब्रिटिश शासन का विरोध किया, जिसमें राजनीतिक और अन्य माध्यम भी शामिल थे। लेकिन इस प्रक्रिया में उन्हें यह एहसास हुआ कि जब तक समाज के भीतर की कमियां दूर नहीं होंगी, तब तक बाहरी ताकतों से पूरी तरह मुक्ति संभव नहीं है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व का अर्थ किसी के खिलाफ खड़ा होना नहीं है, बल्कि सभी के साथ मिलकर चलना और अपने मार्ग पर रहते हुए दूसरों का सम्मान करना है। संघ की विचारधारा इसी समावेशी दृष्टिकोण पर आधारित है।
भागवत के मुताबिक, हेडगेवार चाहते थे कि हिंदू समाज मजबूत, निडर और नैतिक रूप से सशक्त बने। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि समाज अपनी कमजोरियों को दूर नहीं करेगा, तो उसे बार-बार संघर्ष करना पड़ेगा।
संघ प्रमुख ने यह भी कहा कि RSS की स्थापना किसी के विरोध में नहीं हुई थी, बल्कि देश को संगठित और सशक्त बनाने के लिए की गई थी। आज भी संगठन के कार्यकर्ता उसी विचारधारा पर काम कर रहे हैं और समाज को मजबूत करने की दिशा में सक्रिय हैं।
कार्यक्रम में उन्होंने कंडाकुर्थी में बने स्फूर्ति केंद्र को निस्वार्थ सेवा और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाला बताया।
हाल के महीनों में भी भागवत के कई महत्वपूर्ण बयान सामने आए हैं। इससे पहले उन्होंने संगठन के विस्तार को लेकर RSS को 86 संभागों में बांटने की बात कही थी, वहीं एक अन्य कार्यक्रम में यह भी कहा था कि अगर संगठन चाहे तो वे पद छोड़ने के लिए तैयार हैं।