जलवायु परिवर्तन को लेकर ग्रीनलैंड से चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार, पिछले करीब दो दशकों के दौरान ग्रीनलैंड की विशाल बर्फीली चादर से लगभग 12 लाख करोड़ टन बर्फ कम हुई है। बड़े पैमाने पर हो रहा यह बदलाव समुद्र के बढ़ते स्तर और वैश्विक तापमान से जुड़ी चिंताओं को और गंभीर बनाता है।

ग्रीनलैंड दुनिया में अंटार्कटिका के बाद सबसे विशाल बर्फीली चादर वाला क्षेत्र है। यहां जमा बर्फ में होने वाला परिवर्तन पूरी दुनिया के समुद्री तटों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। तापमान बढ़ने से सतह की बर्फ पिघलती है, जबकि समुद्र के संपर्क में मौजूद ग्लेशियरों से भी बड़ी मात्रा में बर्फ टूटकर अलग हो सकती है।
वैज्ञानिक सैटेलाइट डेटा के माध्यम से ग्रीनलैंड की बर्फ में हो रहे बदलावों पर लगातार नजर रखते हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि अलग-अलग वर्षों में कितनी बर्फ कम हुई और किन क्षेत्रों में परिवर्तन सबसे तेजी से हुआ।
बर्फ का लगातार कम होना केवल आर्कटिक क्षेत्र की समस्या नहीं है। इसका संबंध वैश्विक समुद्र स्तर से है और लंबे समय में तटीय शहरों तथा द्वीपीय क्षेत्रों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
वैज्ञानिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आने वाले दशकों में तापमान वृद्धि की गति क्या रहती है। ग्रीनलैंड में हो रहे बदलाव इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि ध्रुवीय क्षेत्रों में होने वाली घटनाओं का प्रभाव हजारों किलोमीटर दूर रहने वाली आबादी तक पहुंच सकता है।






