संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत में आयोजित BRICS गतिविधियों के संदर्भ में समूह की भूमिका की सराहना करते हुए वैश्विक व्यवस्था में बहुपक्षीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसी व्यवस्था की ओर नहीं बढ़ सकती, जहां ताकतवर देश अपनी सुविधा के अनुसार अंतरराष्ट्रीय नियमों को नजरअंदाज करें।
गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र और BRICS के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक देश के स्तर पर संभव नहीं है। युद्ध, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, तकनीकी बदलाव और विकासशील देशों की वित्तीय जरूरतें ऐसे विषय हैं जिन पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।

BRICS में भारत के साथ ब्राजील, रूस, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे मूल सदस्य शामिल हैं और पिछले वर्षों में समूह का विस्तार भी हुआ है। विस्तार के साथ ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग भी तेज हुई है।
गुटेरेस लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार की जरूरत पर बात करते रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक संस्थाओं को आज की दुनिया की वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधिक और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
भारत भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार और विकासशील देशों की अधिक भागीदारी की मांग उठाता रहा है। ऐसे में भारत में BRICS को लेकर गुटेरेस की टिप्पणी वैश्विक शासन व्यवस्था में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की बढ़ती भूमिका की ओर संकेत करती है।





