वॉशिंगटन: 9/11 आतंकी हमलों की 25वीं बरसी के मौके पर अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। अमेरिकी प्रतिनिधि ने आतंकवादी नेटवर्क, उनकी फंडिंग और उन्हें मिलने वाले सुरक्षित ठिकानों को लेकर चिंता जताते हुए वैश्विक स्तर पर मजबूत कार्रवाई की जरूरत बताई।
इस दौरान पाकिस्तान का संदर्भ भी चर्चा में रहा। अमेरिका लंबे समय से दक्षिण एशिया में सक्रिय विभिन्न आतंकी संगठनों और उनके नेटवर्क को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। 9/11 की बरसी के मौके पर आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को और मजबूत करने की बात कही गई।

11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए हमलों में करीब तीन हजार लोगों की मौत हुई थी। आतंकियों ने चार यात्री विमानों को हाईजैक किया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर से टकराए, जबकि एक विमान पेंटागन से टकराया था। चौथा विमान पेंसिल्वेनिया में दुर्घटनाग्रस्त हुआ।
इस हमले ने पूरी दुनिया की सुरक्षा नीति बदल दी थी। इसके बाद अमेरिका ने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक अभियान शुरू किया और अफगानिस्तान में सैन्य कार्रवाई की।
25 साल बाद भी आतंकवाद का स्वरूप पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पारंपरिक आतंकी संगठनों के साथ ऑनलाइन कट्टरपंथ, छोटे नेटवर्क और अकेले हमलावर जैसी नई चुनौतियां सामने आई हैं।
अमेरिका का संदेश यही है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई किसी एक देश तक सीमित नहीं हो सकती। आतंकी नेटवर्क, उनकी फंडिंग और सुरक्षित पनाहगाहों पर संयुक्त अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई जरूरी है।



