अमेरिका और पाकिस्तान के बीच बढ़ती कारोबारी नजदीकियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के परिवार से जुड़ी कंपनी और पाकिस्तान के बीच तेल, क्रिप्टो तथा अन्य क्षेत्रों में समझौतों की खबरों के बाद हितों के टकराव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में अमेरिकी कंपनी द्वारा तेल क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इसके साथ ही ट्रंप परिवार से जुड़ी क्रिप्टो कंपनी और पाकिस्तान के बीच डिजिटल एसेट तथा ब्लॉकचेन से संबंधित सहयोग भी चर्चा में है। आलोचकों का कहना है कि राष्ट्रपति पद पर रहते हुए ट्रंप के परिवार के कारोबारी हितों और अमेरिकी विदेश नीति के बीच स्पष्ट दूरी रहनी चाहिए।
मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका और पाकिस्तान के संबंध लंबे समय से सुरक्षा, आतंकवाद और दक्षिण एशियाई रणनीति से जुड़े रहे हैं। ऐसे में कारोबारी समझौते केवल व्यापार तक सीमित न रहकर कूटनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं संबंधित कंपनियों की ओर से हितों के टकराव के आरोपों से दूरी बनाई गई है। उनका तर्क है कि व्यावसायिक गतिविधियां स्वतंत्र रूप से संचालित की जा रही हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत के लिए भी अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की दिशा महत्वपूर्ण है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि ये समझौते केवल निजी कारोबारी गतिविधियां बने रहते हैं या फिर दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में भी कोई नई भूमिका निभाते हैं।







