नेपाल-चीन (तिब्बत) सीमा से लगे इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। तिब्बत के गिरोंग में कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहा ईशा फाउंडेशन का एक समूह भी इस आपदा की चपेट में आ गया। बताया गया है कि श्रद्धालु वापसी के दौरान चीन के इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे, तभी तेज बाढ़ ने इमारत और आसपास के इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद इमिग्रेशन सेंटर में मौजूद लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव खुद गिरोंग पहुंचकर राहत और बचाव प्रयासों की निगरानी कर रहे हैं।

ईशा फाउंडेशन के अनुसार इस वर्ष कैलाश यात्रा के लिए कुल 21 समूह तिब्बत गए थे। इनमें से 495 यात्री सुरक्षित लौट चुके हैं, जबकि 743 लोग अभी तिब्बत और 148 लोग नेपाल में मौजूद हैं। वहीं, 77 लोगों के इमिग्रेशन सेंटर में फंसे होने या लापता होने की जानकारी दी गई है। नेपाल के तिमुरे में तीन वॉलंटियर्स भी मौजूद हैं। सद्गुरु ने कहा है कि उनकी टीम और स्वयंसेवक स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित क्षेत्र तक पहुंचने और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के प्रयास में जुटे हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं के परिवारों को भरोसा दिलाया कि बचाव अभियान में हर संभव प्रयास किया जा रहा है।



