नालंदा में मिड-डे मील में नमक की जगह डिटर्जेंट! 40 बच्चों की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती

National August 20, 2026 By Bharat Bhushan Malviya
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हर माता-पिता के लिए बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनकी सेहत भी सबसे बड़ी चिंता होती है। ऐसे में अगर स्कूल में मिलने वाले भोजन को लेकर ही लापरवाही की खबर सामने आए, तो चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। बिहार के नालंदा से सामने आया एक ऐसा ही मामला इन दिनों चर्चा में है, जहां आरोप है कि मिड-डे मील में नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर पहुंच गया। इसके बाद कई बच्चों की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा।

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मामला नूरसराय प्रखंड के परासी मिडिल स्कूल का बताया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 34 से 40 बच्चों के प्रभावित होने की बात सामने आई है। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

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आखिर स्कूल में उस दिन क्या हुआ?

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बताया जा रहा है कि मंगलवार को स्कूल में बच्चों को मिड-डे मील में चावल और सोयाबीन-आलू की सब्जी परोसी गई थी। खाना खाते समय कुछ बच्चों ने सब्जी में नमक कम होने की शिकायत की।

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आरोप है कि इसके बाद बच्चों को नमक देने के दौरान गलती से नमक की जगह डिटर्जेंट पाउडर दे दिया गया। बच्चों ने इसे बिना पहचाने खाने में इस्तेमाल कर लिया। इसके कुछ ही देर बाद कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी।

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बच्चों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिलते ही स्कूल में हड़कंप मच गया। प्रभावित बच्चों को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज कराया गया।

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डिटर्जेंट खाने से बच्चों को कितना नुकसान हो सकता है?

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डिटर्जेंट खाने के लिए नहीं होता और इसके संपर्क में आने से स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। खासकर बच्चों का शरीर संवेदनशील होने के कारण जोखिम अधिक हो सकता है।

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डिटर्जेंट निगलने के बाद मुंह और गले में जलन, मतली, उल्टी और पेट दर्द जैसी समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में गले में सूजन या सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है।

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अगर अधिक मात्रा में डिटर्जेंट शरीर में चला जाए तो स्थिति गंभीर हो सकती है और खाने की नली या पेट में जलन और क्षति का खतरा भी रहता है। इसलिए ऐसी स्थिति में घरेलू स्तर पर इलाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

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बच्चों के मामले में बरतें खास सावधानी

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अगर किसी बच्चे ने गलती से डिटर्जेंट या किसी अन्य घरेलू रसायन को निगल लिया है, तो उसे जबरदस्ती उल्टी कराने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। तुरंत डॉक्टर या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करना चाहिए और संभव हो तो उस उत्पाद का पैकेट या नाम साथ ले जाना चाहिए।

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नालंदा की यह घटना स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता, निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। बच्चों के भोजन में छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है, इसलिए ऐसी व्यवस्था में अतिरिक्त सावधानी बेहद जरूरी है।

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