देशभर में भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लोकसभा ने लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया है। करीब दस घंटे तक चली विस्तृत चर्चा के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार की ओर से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह संशोधन सरकार की उस सोच को दर्शाता है जिसमें अनुभवों से सीख लेकर व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है। चर्चा पूरी होने के बाद विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बीच विधेयक ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। अब इसे आगे की प्रक्रिया के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
पेपर लीक पर कड़ी सजा का प्रावधान
नए संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति पेपर लीक, प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ या परीक्षा में अनुचित साधनों के इस्तेमाल का दोषी पाया जाता है, तो उसे कम से कम पांच वर्ष और अधिकतम दस वर्ष तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा ऐसे मामलों में 50 लाख रुपये तक का आर्थिक दंड भी लगाया जा सकेगा।
यदि जांच में यह मामला संगठित अपराध या संगठित गिरोह से जुड़ा पाया जाता है, तो सजा और भी कठोर होगी। ऐसे मामलों में न्यूनतम सात वर्ष की कैद और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान रखा गया है।
जांच और सुनवाई होगी समयबद्ध
संशोधन विधेयक में यह भी व्यवस्था की गई है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों की सुनवाई विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों में की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा किया जाए।

इसके अलावा केंद्र सरकार को ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष कार्यबल (एसटीएफ) गठित करने का अधिकार मिलेगा। जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य भी दिया गया है, ताकि मामलों का जल्द निस्तारण हो सके।
सदन में विपक्ष का हंगामा
विधेयक पर सरकार का पक्ष रखते समय लोकसभा में विपक्षी सांसदों ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कई सदस्य वेल में पहुंच गए और गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देने की मांग करते रहे। शोर-शराबे के बीच ही डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपना जवाब पूरा किया और कहा कि इतने महत्वपूर्ण विधेयक पर रचनात्मक सुझावों की अपेक्षा थी, लेकिन चर्चा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में बदल गई।
राहुल गांधी की टिप्पणी पर बढ़ा विवाद

इससे पहले विधेयक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की एक टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। उनके बयान पर सदन में तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण उनका संबोधन बीच में ही बाधित हो गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से माफी की मांग करते हुए कहा कि संसद में किसी भी सदस्य को बिना जिम्मेदारी के आरोप लगाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

यदि यह विधेयक राज्यसभा से भी पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो देश में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और परीक्षा संबंधी संगठित धोखाधड़ी के खिलाफ पहले से अधिक कठोर कानूनी व्यवस्था लागू हो जाएगी।

