दिल्ली सरकार अब वायु प्रदूषण की स्थिति का पहले से अनुमान लगाने के लिए एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम लागू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत राजधानी में हवा कब खराब होगी, इसका अलर्ट 48 से 72 घंटे पहले मिल सकेगा।
IIT कानपुर के साथ मिलकर बनेगा सिस्टम
यह पूरा सिस्टम IIT कानपुर के सहयोग से विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य एक ऐसा “Decision Support System” तैयार करना है, जो प्रदूषण के स्तर का पूर्वानुमान लगाने के साथ-साथ यह भी बताए कि किन इलाकों में प्रदूषण तेजी से बढ़ सकता है।

कैसे काम करेगा AI सिस्टम

नई तकनीक में AI मॉडल को लगातार अपडेट होने वाले डेटा से जोड़ा जाएगा, जिसमें शामिल होंगे:

हवा की गुणवत्ता (AQI) के आंकड़े

मौसम की स्थिति
प्रदूषण के स्रोतों का डेटा
इससे सिस्टम यह पहचान सकेगा कि किस इलाके में प्रदूषण कब और कितनी तेजी से बढ़ सकता है।

पहले से ज्यादा सटीक और तेज चेतावनी
अधिकारियों के अनुसार, यह सिस्टम पुराने मॉडल की तुलना में ज्यादा तेज और सटीक होगा। अभी तक जहां दैनिक आधार पर अनुमान मिलता था, वहीं नया AI सिस्टम शुरुआती संकेतों के आधार पर पहले ही चेतावनी जारी कर सकेगा, ताकि समय रहते GRAP जैसे कदम लागू किए जा सकें।
निगरानी नेटवर्क भी होगा मजबूत
इस योजना के तहत दिल्ली में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग नेटवर्क को भी बढ़ाया जाएगा:
कम लागत वाले सेंसर लगाए जाएंगे
मोबाइल मॉनिटरिंग यूनिट्स का इस्तेमाल होगा
सैटेलाइट डेटा को भी सिस्टम से जोड़ा जाएगा
इससे शहर के अलग-अलग हिस्सों की हवा की स्थिति और बेहतर तरीके से ट्रैक की जा सकेगी।
लक्ष्य क्या है?
इस AI आधारित सिस्टम का मुख्य उद्देश्य है:
प्रदूषण की पहले से चेतावनी देना
हॉटस्पॉट की पहचान करना
प्रशासन को समय रहते कार्रवाई का मौका देना
वायु गुणवत्ता प्रबंधन को अधिक वैज्ञानिक बनाना
निष्कर्ष
दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण संकट के बीच यह AI सिस्टम एक बड़ा तकनीकी कदम माना जा रहा है। अगर यह प्रभावी रहा, तो भविष्य में यह न सिर्फ दिल्ली बल्कि देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।