दिल्ली के यमुना बाजार इलाके में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने फ्लडप्लेन क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस कार्रवाई के तहत कई प्रॉपर्टीज को ध्वस्त किया गया और स्थानीय निवासियों को क्षेत्र खाली करने के निर्देश दिए गए हैं।

फ्लडप्लेन और O-Zone पर कार्रवाई
यह पूरा इलाका यमुना नदी के संवेदनशील फ्लडप्लेन क्षेत्र में आता है, जिसे मास्टर प्लान के तहत “O-Zone” घोषित किया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के स्थायी निर्माण को पर्यावरणीय और बाढ़ सुरक्षा कारणों से अवैध माना जाता है।
NGT और अदालतों के निर्देशों के बाद DDA ने इस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

अचानक कार्रवाई से हड़कंप
तोड़फोड़ अभियान के दौरान इलाके में अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। कई लोगों को अचानक अपने घर खाली करने पड़े। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को अस्थायी पुनर्वास या शेल्टर होम में जाने की सलाह दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे यहां लंबे समय से रह रहे हैं, जबकि प्रशासन का तर्क है कि यह जमीन नदी के प्राकृतिक प्रवाह और बाढ़ सुरक्षा क्षेत्र का हिस्सा है।
O-Zone क्या है?
यमुना फ्लडप्लेन को “O-Zone” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यह क्षेत्र नदी के प्राकृतिक विस्तार और बाढ़ नियंत्रण के लिए आरक्षित होता है। यहां अनियंत्रित निर्माण से बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है और नदी की पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचता है।

लगातार बढ़ रही कार्रवाई
पिछले कुछ समय से दिल्ली में यमुना किनारे अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। DDA का कहना है कि यह कार्रवाई पर्यावरण संरक्षण और सुप्रीम कोर्ट/NGT के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है।
निष्कर्ष
यमुना बाजार की यह कार्रवाई एक बार फिर दिल्ली में विकास, पुनर्वास और पर्यावरण संरक्षण के बीच टकराव को सामने लाती है। प्रशासन जहां इसे जरूरी कदम बता रहा है, वहीं प्रभावित परिवारों के लिए यह एक बड़ी विस्थापन की स्थिति बन गई है।

