बिहार में सरकारी आवासों को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी बंगला खाली करने से जुड़े बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कई नेताओं पर तीखा हमला बोला है।

राबड़ी देवी ने स्पष्ट कहा है कि वह स्वयं सरकारी आवास खाली नहीं करेंगी और यदि सरकार चाहती है तो उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत बाहर कर सकती है। उनके इस बयान के बाद RJD ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार की आवास नीति पर सवाल खड़े किए।
पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री आवास परिसर के आसपास स्थित कई सरकारी बंगलों को मुख्य परिसर में शामिल कर लिया है। RJD का दावा है कि इससे मुख्यमंत्री आवास का कुल क्षेत्रफल काफी बढ़ गया है। पार्टी ने इसे लेकर सवाल उठाया कि क्या किसी मुख्यमंत्री को प्रशासनिक कार्यों और निवास के लिए इतनी बड़ी भूमि की आवश्यकता है।

RJD ने मुख्यमंत्री आवास का नाम बदलकर "लोक सेवक आवास" किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि नाम परिवर्तन के साथ-साथ आवास परिसर के विस्तार को भी उचित ठहराने की कोशिश की गई है।
इसके अलावा RJD ने कई वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों को आवंटित सरकारी आवासों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि कुछ नेता ऐसे पदों पर नहीं हैं जिनके आधार पर उन्हें सरकारी आवास मिलना चाहिए, फिर भी वे सरकारी बंगलों का उपयोग कर रहे हैं।
RJD ने अपने आरोपों में कई प्रमुख नेताओं और सांसदों के नाम भी शामिल किए हैं। पार्टी का कहना है कि कुछ जनप्रतिनिधियों के पास अन्य स्थानों पर सरकारी आवास उपलब्ध होने के बावजूद वे पटना में भी सरकारी सुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।
इस पूरे विवाद के बाद बिहार की राजनीति में सरकारी आवास और सरकारी संसाधनों के उपयोग का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी दिनों में इस विषय पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज हो सकती है।
फिलहाल सरकार की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है, जबकि विपक्ष इसे पारदर्शिता और जवाबदेही का मुद्दा बताकर लगातार उठाने की तैयारी में है।


