केरल में बुधवार को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम पूर्व मुख्यमंत्री Pinarayi Vijayan से जुड़े परिसरों पर छापेमारी के बाद बाहर निकल रही थी। आरोप है कि इस दौरान CPI(M) कार्यकर्ताओं ने ईडी अधिकारियों के वाहनों को घेर लिया और जमकर विरोध प्रदर्शन किया।
बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारियों ने ईडी अधिकारियों की गाड़ियों पर पथराव और ईंटबाजी की। कई वाहनों के शीशे और साइड मिरर टूट गए। जिस वाहन में एक महिला अधिकारी मौजूद थीं, उसे भी निशाना बनाया गया। विरोध कर रहे लोगों ने केंद्र सरकार और ईडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए सड़े अंडे भी फेंके। घटना में एक चालक के घायल होने की भी खबर है।
मौके पर मौजूद पुलिस शुरुआती समय में भीड़ को नियंत्रित नहीं कर सकी। बाद में ईडी अधिकारी थंपनूर पुलिस स्टेशन पहुंचे और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। घटना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
दरअसल, ईडी ने बुधवार को केरल में करीब 10 ठिकानों पर छापेमारी की। इनमें Pinarayi Vijayan और उनकी बेटी Veena Vijayan से जुड़े ठिकाने भी शामिल बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई कथित मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में की गई।
जांच का केंद्र Veena Vijayan की कंपनी Exalogic Solutions Private Limited और Kochi Minerals and Rutile Limited (CMRL) के बीच हुए कथित लेनदेन हैं। आरोप है कि कंपनी को बिना किसी वास्तविक सेवा के करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया। बताया जा रहा है कि 2017 में दोनों कंपनियों के बीच सॉफ्टवेयर और मार्केटिंग सेवाओं को लेकर समझौता हुआ था, लेकिन जांच एजेंसियों को सेवाओं के स्पष्ट सबूत नहीं मिले।
इस मामले में अप्रैल 2025 में Serious Fraud Investigation Office (SFIO) द्वारा दाखिल चार्जशीट को भी अहम आधार माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि 2018-19 से अगले कुछ वर्षों तक संदिग्ध भुगतान किए गए।
घटना के बाद Pinarayi Vijayan ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयों से न तो वे डरेंगे और न ही उनकी पार्टी कमजोर होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। वहीं CPI(M) महासचिव M. A. Baby ने भी ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया।
जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले की शुरुआती जांच 2019 में आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान सामने आई थी। उसी दौरान पहली बार कथित संदिग्ध भुगतानों का जिक्र आधिकारिक रिपोर्ट में किया गया था।



