संयुक्त राष्ट्र (UN) की हालिया रिपोर्ट को लेकर इजरायल और UN के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट में फिलिस्तीनी कैदियों के साथ कथित यौन हिंसा और दुर्व्यवहार से जुड़े कई मामलों का उल्लेख किया गया है, जिसके बाद इजरायल ने कड़ी आपत्ति जताई है।

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान फिलिस्तीनी बंदियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न और हिंसा से जुड़े कई सत्यापित मामलों की पहचान की गई। इनमें कथित तौर पर यौन हमले, यौन उत्पीड़न, अपमानजनक तलाशी और जबरन कपड़े उतरवाने जैसी घटनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट में पुरुषों, महिलाओं और किशोर बंदियों से जुड़े मामलों का भी जिक्र किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र ने कहा है कि ये घटनाएं विभिन्न हिरासत केंद्रों, जेलों और पूछताछ स्थलों पर सामने आई हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जांच के दौरान कुछ मामलों में स्वतंत्र पहुंच सीमित रही, जिससे सभी आरोपों की पूरी तरह जांच करना चुनौतीपूर्ण रहा।
रिपोर्ट जारी होने के बाद इजरायल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के प्रतिनिधियों ने रिपोर्ट को पक्षपातपूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की और कहा कि देश की सुरक्षा एजेंसियों को गलत तरीके से निशाना बनाया जा रहा है।
इजरायल के विदेश मंत्रालय ने भी रिपोर्ट को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। मंत्रालय का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की कुछ रिपोर्टें लगातार इजरायल के खिलाफ पूर्वाग्रह दिखाती हैं। इसी के चलते इजरायल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के कार्यालय के साथ अपने सहयोग को सीमित करने की घोषणा की है।
दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट का बचाव करते हुए कहा है कि निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों और सत्यापित जानकारी के आधार पर तैयार किए गए हैं। संगठन ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों पर वह कायम है।
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब गाजा संघर्ष, मानवाधिकार मुद्दों और बंदियों के साथ व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज है। माना जा रहा है कि इस घटनाक्रम से इजरायल और संयुक्त राष्ट्र के बीच पहले से मौजूद तनाव और बढ़ सकता है।



