अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच वॉशिंगटन ने तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का दावा किया है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के अनुसार, अमेरिकी एजेंसियों ने ईरान से जुड़े लगभग 1 अरब डॉलर मूल्य के क्रिप्टोकरेंसी फंड को जब्त किया है। यह कार्रवाई अमेरिका के विशेष अभियान "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी" के तहत की गई बताई जा रही है।
एक मीडिया कार्यक्रम में बातचीत के दौरान बेसेंट ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान से जुड़े डिजिटल वॉलेट्स पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। उनका दावा है कि हाल के महीनों में लागू किए गए आर्थिक प्रतिबंधों और अन्य कदमों का ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है।

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि लगातार बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण ईरान आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। बेसेंट के मुताबिक, देश में महंगाई बढ़ी है और सरकार को आम लोगों के लिए राहत योजनाओं पर अधिक निर्भर होना पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वित्तीय संसाधनों की कमी का असर सरकारी व्यवस्थाओं पर दिखाई देने लगा है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, मार्च 2025 में शुरू किए गए "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी" के तहत ईरान के बैंकिंग नेटवर्क, विदेशी संपत्तियों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े कई स्रोतों को निशाना बनाया गया है। अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर विदेशों में मौजूद कुछ संपत्तियों और निवेशों की भी जांच कर रहा है।
बेसेंट ने आरोप लगाया कि ईरान से जुड़े कुछ वित्तीय नेटवर्क के माध्यम से बड़ी मात्रा में धन जुटाया जा रहा था, जिस पर अब अमेरिकी कार्रवाई का प्रभाव पड़ रहा है। उनका कहना है कि इन स्रोतों पर नियंत्रण से ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है।
ईरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत पर टिप्पणी करते हुए अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने कहा कि अमेरिका विभिन्न स्तरों पर संवाद बनाए हुए है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और वित्तीय गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर सहयोगी देशों के साथ समन्वय बढ़ाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की यह रणनीति ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाकर उसे वार्ता की दिशा में आगे बढ़ाने का प्रयास है। हालांकि, इन दावों और उनके वास्तविक प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है।

