यमुनानगर अब खेती में नई सोच और संतुलित उर्वरक उपयोग के कारण चर्चा में है। यहां किसानों ने जरूरत से ज्यादा यूरिया इस्तेमाल करने की बजाय वैज्ञानिक तरीके से खेती पर ध्यान देना शुरू किया है। इसका असर यह हुआ कि जिले में यूरिया की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में जिले में यूरिया की खपत पिछले साल की तुलना में 22 प्रतिशत से ज्यादा कम हुई है। बताया जा रहा है कि इस कमी से सरकार को सब्सिडी के रूप में करीब 123 करोड़ रुपये की बचत हुई है। विशेषज्ञ इसे खेती और सरकारी संसाधनों दोनों के लिए सकारात्मक बदलाव मान रहे हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, किसानों को मिट्टी की जरूरत के अनुसार खाद इस्तेमाल करने के लिए लगातार जागरूक किया गया। गांव स्तर पर अलग-अलग योजनाएं बनाकर किसानों को सही मात्रा में उर्वरक डालने की सलाह दी गई। खेतों में प्रदर्शन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए भी किसानों को संतुलित खेती के फायदे समझाए गए।
कृषि विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया कि सब्सिडी वाला यूरिया केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे। इसके लिए आधार और जमीन रिकॉर्ड से जुड़े तंत्र का इस्तेमाल किया गया। साथ ही संदिग्ध खरीद और गलत इस्तेमाल पर निगरानी रखी गई।
अधिकारियों ने बताया कि सब्सिडी वाले यूरिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए कई जगह कार्रवाई भी की गई। जांच के दौरान हजारों यूरिया बैग जब्त किए गए और नियम उल्लंघन के मामलों में कई लाइसेंस रद्द किए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की संतुलित खेती न केवल मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद करेगी, बल्कि भविष्य में खेती की लागत कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाएगी।

