भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस सप्ताह के अंत तक अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, अंडमान सागर और दक्षिणी बंगाल की खाड़ी के कुछ हिस्सों में पहुंच सकता है। खास बात यह है कि मानसून की यह दस्तक सामान्य समय से कुछ दिन पहले होने की संभावना है।
आमतौर पर मानसून 21 मई के आसपास अंडमान क्षेत्र में पहुंचता है, लेकिन इस बार इसके जल्दी आने के संकेत मिल रहे हैं। IMD के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना लो-प्रेशर एरिया अगले 48 घंटों में और मजबूत हो सकता है, जिससे मानसून की गतिविधियां तेज होंगी।
मौसम विभाग के महानिदेशक एम. मोहपात्रा ने कहा कि 15 मई के आसपास मुख्य भूमि भारत में मानसून के प्रवेश को लेकर भी विस्तृत पूर्वानुमान जारी किया जाएगा। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून को केरल पहुंचता है और फिर चरणबद्ध तरीके से पूरे देश में फैलता है।
IMD ने पहले ही अनुमान जताया था कि इस साल देश में सामान्य से कम बारिश हो सकती है। विभाग के अनुसार, 2026 में मानसून करीब 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिकों ने अल नीनो प्रभाव को भी चिंता का विषय बताया है, क्योंकि इससे बारिश कमजोर पड़ सकती है और गर्मी अधिक बढ़ सकती है।
इस बीच, देश के कई हिस्सों में हीटवेव की स्थिति बने रहने की संभावना है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य भारत के कुछ इलाकों में अगले कुछ दिनों तक तेज गर्मी पड़ सकती है। वहीं दक्षिण भारत के तमिलनाडु, केरल, पुडुचेरी और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून भारतीय अर्थव्यवस्था और कृषि के लिए बेहद अहम होता है, क्योंकि देश के बड़े हिस्से की खेती अब भी बारिश पर निर्भर है।


