दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर तनाव का केंद्र बन गया है। बुधवार को ईरानी सेना ने अंतरराष्ट्रीय जलसीमा से गुजर रहे तीन मालवाहक जहाजों पर गोलीबारी कर दी और उन्हें अपने कब्जे में ले लिया। इस घटना ने न केवल क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता गहरा दी है।

जानकारी के मुताबिक, ईरान की अर्धसैनिक ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ ने पहले एक कंटेनर जहाज पर गोलीबारी की, फिर कुछ ही देर में दूसरे जहाज को निशाना बनाया। इसके बाद तीसरे जहाज पर भी हमला किया गया। ईरानी मीडिया का दावा है कि इन जहाजों ने चेतावनी का पालन नहीं किया, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई।

⚠️ शांति वार्ता के बीच बढ़ा तनाव

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम को बढ़ाने की कोशिशें जारी थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में सीजफायर को आगे बढ़ाने का ऐलान किया था, लेकिन साथ ही ईरान की घेराबंदी जारी रखने की बात भी कही थी।
ईरान इसी मुद्दे को लेकर नाराज है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक अमेरिका घेराबंदी खत्म नहीं करता, तब तक किसी भी तरह की शांति वार्ता संभव नहीं है। यही वजह है कि सीजफायर के बावजूद समुद्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
🌍 वैश्विक बाजार पर असर
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है। यहां तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर दिख रहा है।
कच्चे तेल की कीमत 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है
युद्ध शुरू होने के बाद तेल की कीमतों में करीब 35% तक बढ़ोतरी
पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ने का खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह समुद्री रास्ता लंबे समय तक प्रभावित रहा, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।
🕊️ कूटनीति भी ठप
इस बीच पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता की कोशिशें भी ठंडी पड़ती नजर आ रही हैं। पाकिस्तान अगले दौर की वार्ता की मेजबानी करना चाहता है, लेकिन ईरान ने अभी तक इसमें शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।
ईरान का साफ कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी नीति नहीं बदलता, तब तक बातचीत संभव नहीं है। इससे साफ है कि फिलहाल कूटनीतिक रास्ते बंद होते नजर आ रहे हैं और तनाव कम होने की उम्मीद कम है।
⚔️ युद्ध का बढ़ता असर
इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों से हुई थी। तब से अब तक हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
ईरान में 3,375 से ज्यादा मौतें
लेबनान में 2,000 से अधिक लोग मारे गए
कई देशों में भी जान-माल का नुकसान
ईरान के सख्त तेवर और बढ़ती सैन्य गतिविधियां इस बात का संकेत हैं कि आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।