उत्तर प्रदेश की राजनीति में PDA यानी पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक के मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। बसपा प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी की PDA रणनीति पर हमला बोलते हुए इसे चुनावी राजनीति से प्रेरित बताया।
मायावती ने कहा कि केवल नारे देने से दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों की समस्याएं दूर नहीं होंगी। उनके मुताबिक इन वर्गों को वास्तविक सामाजिक और आर्थिक भागीदारी देने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की जरूरत है।
बसपा प्रमुख ने अपने समर्थकों को दूसरे दलों के चुनावी नारों से सावधान रहने की सलाह भी दी। उनका जोर इस बात पर रहा कि बहुजन समाज की राजनीतिक हिस्सेदारी और अधिकार केवल चुनावी गठजोड़ तक सीमित नहीं होने चाहिए।
समाजवादी पार्टी पिछले कुछ समय से PDA को अपनी प्रमुख राजनीतिक रणनीति के तौर पर आगे बढ़ा रही है। पार्टी का दावा है कि इसका उद्देश्य पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना है। ऐसे में मायावती का हमला सीधे तौर पर सपा के इसी सामाजिक समीकरण को चुनौती देता दिखाई दे रहा है।

उत्तर प्रदेश में दलित और पिछड़े मतदाता लंबे समय से चुनावी राजनीति का महत्वपूर्ण आधार रहे हैं। इसी वजह से इन समुदायों के प्रतिनिधित्व को लेकर सपा और बसपा दोनों की रणनीति अहम है।

आने वाले चुनावों से पहले PDA को लेकर यह सियासी मुकाबला और तेज होने की संभावना है।





