नई दिल्ली: भारत की परमाणु क्षमता को लेकर एक नई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट ने चर्चा तेज कर दी है। Federation of American Scientists (FAS) से जुड़ी रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत ने हाल के समय में अपने परमाणु हथियारों के भंडार में वृद्धि की है और करीब 30 नए हथियार तैयार किए हो सकते हैं।
रिपोर्ट में भारत के परमाणु शस्त्रागार को लेकर विभिन्न ओपन-सोर्स आंकड़ों और विश्लेषण के आधार पर अनुमान प्रस्तुत किए गए हैं। इसमें दावा किया गया है कि भारत के पास परमाणु हथियारों की संख्या पहले की तुलना में बढ़ी है और देश अपनी न्यूक्लियर डिलीवरी क्षमता को भी आधुनिक बना रहा है।
भारत जमीन से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ समुद्र और वायु आधारित परमाणु क्षमता विकसित करने पर लंबे समय से काम कर रहा है। इसका उद्देश्य एक भरोसेमंद nuclear triad तैयार करना है, जिससे जरूरत पड़ने पर जमीन, हवा और समुद्र—तीनों माध्यमों से जवाबी क्षमता उपलब्ध रहे।

हालांकि यह समझना जरूरी है कि परमाणु हथियारों की वास्तविक संख्या से जुड़ी जानकारी सामान्यतः आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं की जाती। इसलिए FAS जैसे संगठनों के आंकड़े मुख्यतः विश्लेषण और अनुमान पर आधारित होते हैं।
भारत की घोषित परमाणु नीति में न्यूनतम विश्वसनीय प्रतिरोध यानी Credible Minimum Deterrence महत्वपूर्ण सिद्धांत रहा है। भारत ने लंबे समय से अपनी परमाणु क्षमता को मुख्यतः प्रतिरोधक रणनीति के रूप में प्रस्तुत किया है।
चीन और पाकिस्तान की परमाणु तथा मिसाइल क्षमताओं में बदलाव के बीच भारत का आधुनिकीकरण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई रिपोर्ट ने एक बार फिर दक्षिण एशिया में बदलते परमाणु संतुलन और भारत की भविष्य की रक्षा रणनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।


