दिल्ली सरकार ने निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन के लिए प्रस्तावित प्राइवेट यूनिवर्सिटी बिल को मंजूरी दे दी है। बिल के तहत निजी विश्वविद्यालयों को सरकार की अधिसूचना के जरिए स्थापित करने की अनुमति दी जा सकेगी, लेकिन उन्हें UGC और संबंधित वैधानिक नियामक संस्थाओं के नियमों का पालन करना होगा। प्रस्तावित विश्वविद्यालय यूनिटरी मॉडल पर काम करेंगे और दूसरे कॉलेजों को संबद्धता नहीं दे सकेंगे। विश्वविद्यालय स्थापित करने वाली संस्था के पास कम से कम 30 साल के लिए जमीन या वैध लीज होना जरूरी होगा, साथ ही शिक्षण भवन, लैब, लाइब्रेरी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।
ड्राफ्ट में हर पाठ्यक्रम की 25 फीसदी सीटें दिल्ली के छात्रों के लिए आरक्षित रखने का प्रावधान भी किया गया है। इन सीटों पर दाखिला दिल्ली सरकार की मौजूदा आरक्षण नीति के अनुसार होगा। शिक्षा मंत्री आशीष सूद के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य दिल्ली के छात्रों को अपने शहर में ही बेहतर उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों या विदेशों का रुख न करना पड़े। बिल में विश्वविद्यालयों की निगरानी, नियामकीय मानकों के पालन और फर्जी या केवल व्यावसायिक उद्देश्य से चलने वाले संस्थानों पर रोक के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब बिल को दिल्ली विधानसभा में पेश किया जाएगा।




