प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सेशेल्स दौरे के दौरान इतिहास रचते हुए वहां की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनने का गौरव हासिल किया। अपने संबोधन में उन्होंने भारत और सेशेल्स के बीच 50 वर्षों पुराने राजनयिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि हिंद महासागर दोनों देशों को जोड़ने वाला साझा सेतु है, जो सुरक्षा, विकास और समृद्धि के नए अवसर प्रदान करता है। साथ ही लोकतंत्र, कानून के शासन और जनकल्याण जैसे साझा मूल्यों को दोनों देशों की साझेदारी की मजबूत नींव बताया।

प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा, अंतरिक्ष, कृषि, शिपिंग, प्रत्यर्पण, क्षमता निर्माण और यूपीआई समेत कई क्षेत्रों में अहम समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारत ने सेशेल्स के विकास के लिए 1,250 करोड़ रुपये की लाइन ऑफ क्रेडिट की भी घोषणा की। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा, बुनियादी ढांचे, कौशल विकास और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।
जलवायु परिवर्तन और समुद्री संरक्षण पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जलवायु संकट से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग जरूरी है और भारत इस दिशा में सेशेल्स के साथ मिलकर काम करता रहेगा। इस दौरान उन्हें सेशेल्स के सर्वोच्च सम्मान 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' से सम्मानित किया गया, जिसे उन्होंने जलवायु परिवर्तन से जूझ रहे सभी देशों को समर्पित बताया।



