केंद्र सरकार ने अपने कब्जे में लिया जयपुर पोलो ग्राउंड, रेस कोर्स इलाके में बढ़ा विवाद

National June 14, 2026 By Santosh Pandit
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दिल्ली के रेस कोर्स इलाके में स्थित ऐतिहासिक जयपुर पोलो ग्राउंड को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय पोलो संघ के बीच विवाद गहरा गया है। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने शनिवार सुबह कार्रवाई करते हुए जयपुर पोलो ग्राउंड को अपने कब्जे में ले लिया और परिसर को सील कर दिया। यह ग्राउंड अब तक भारतीय पोलो संघ के प्रबंधन में संचालित हो रहा था।

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जयपुर पोलो ग्राउंड लुटियंस दिल्ली के बीचों-बीच स्थित लगभग 15.20 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और इसे देश के सबसे प्रतिष्ठित पोलो मैदानों में गिना जाता है। यहां वर्षों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की पोलो प्रतियोगिताएं आयोजित होती रही हैं।

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केंद्र सरकार का दावा है कि यह भूमि मूल रूप से सरकारी है और वर्ष 1951 में इसे 20 साल की लीज पर दिया गया था। सरकार के अनुसार यह लीज 1993 में समाप्त हो गई थी, लेकिन उसके बाद भी भारतीय पोलो संघ इस जमीन पर कब्जा बनाए हुए था, जिसे सरकार अवैध मान रही है।

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इस कार्रवाई से पहले 20 मई को केंद्र सरकार ने बेदखली आदेश जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि इस भूमि का उपयोग “बड़े सार्वजनिक हित और जनकल्याण” के लिए किया जाएगा। हालांकि सरकार ने अब तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि जमीन का उपयोग किस विशेष परियोजना या उद्देश्य के लिए होगा।

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गौरतलब है कि कार्रवाई से ठीक एक दिन पहले सेशन कोर्ट ने भारतीय पोलो संघ की याचिका पर बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने कहा कि इस मामले में पहले भी उच्च अदालतों से राहत नहीं मिली है, इसलिए न्यायिक प्रक्रिया का पालन करते हुए वह बेदखली पर रोक नहीं लगा सकते।

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इससे पहले 8 जून को दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था कि 12 जून तक किसी भी प्रकार की जबरन बेदखली नहीं की जाएगी। हाई कोर्ट ने इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लिया था, लेकिन साथ ही राजधानी में घटते हरित क्षेत्रों को लेकर चिंता भी जताई थी।

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सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि यदि दिल्ली के खुले और हरित क्षेत्र लगातार कम होते गए तो शहर का पर्यावरणीय संतुलन गंभीर रूप से प्रभावित होगा। अदालत ने कहा था कि नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) क्षेत्र में बची हुई खुली जगहों का संरक्षण जरूरी है।

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भारतीय पोलो संघ ने केंद्र की कार्रवाई को मनमाना और कानून के खिलाफ बताया है। संघ के वकील Nirvikar Singh ने कहा कि संघ इस आदेश की समीक्षा कर रहा है और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगा। मामले की अगली सुनवाई 17 जून 2026 को निर्धारित है।

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केंद्र सरकार का कहना है कि कमाल अतातुर्क मार्ग के आसपास स्थित यह भूमि रक्षा अवसंरचना को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए आवश्यक है। इसी आधार पर जयपुर पोलो ग्राउंड सहित अन्य परिसरों पर कार्रवाई की जा रही है।

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फिलहाल यह मामला कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर संवेदनशील बना हुआ है। एक तरफ सरकार इसे सार्वजनिक और राष्ट्रीय हित से जोड़ रही है, तो दूसरी ओर खेल जगत और पर्यावरण से जुड़े लोग इस ऐतिहासिक और हरित परिसर के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

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