पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा पर रहने वाले ग्रामीणों ने सीमा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अनूठी पहल की है। क्षेत्र के कुछ किसानों ने सीमा पर कंटीले तार लगाने के लिए स्वेच्छा से अपनी जमीन देने का फैसला किया है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से खुले सीमा क्षेत्रों के कारण उन्हें पशु चोरी, घुसपैठ और तस्करी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

सीमावर्ती गांवों के लोगों का दावा है कि बांग्लादेश की ओर से मवेशियों की चोरी और अवैध गतिविधियों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं। उनका मानना है कि सीमा पर फेंसिंग पूरी होने के बाद इन समस्याओं पर काफी हद तक रोक लग सकेगी और स्थानीय लोगों की सुरक्षा भी बढ़ेगी।

कूचबिहार भारत-बांग्लादेश सीमा से सटा एक महत्वपूर्ण जिला है, जहां कई क्षेत्रों में लंबे समय से फेंसिंग का कार्य अधूरा था। हाल के महीनों में सीमा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने के बाद ग्रामीणों ने स्वयं आगे आकर प्रशासन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के प्रयासों का समर्थन किया है।

ग्रामीणों का कहना है कि सीमा पर कंटीले तार लगने से न केवल घुसपैठ की घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि खेती-किसानी और स्थानीय लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी भी अधिक सुरक्षित हो सकेगी। कई निवासियों ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय हितों से जुड़ा मुद्दा बताया है।
इस बीच राज्य सरकार और केंद्र सरकार भी भारत-बांग्लादेश सीमा को अधिक सुरक्षित बनाने के लिए संयुक्त रूप से कार्य कर रही हैं। हाल ही में सीमा पर फेंसिंग और सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने के लिए भूमि हस्तांतरण और बुनियादी ढांचे के विकास की प्रक्रिया तेज की गई है। BSF को कई स्थानों पर भूमि उपलब्ध कराई गई है ताकि लंबित फेंसिंग परियोजनाओं को पूरा किया जा सके।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में कूचबिहार और आसपास के सीमावर्ती इलाकों में घुसपैठ और सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे चर्चा में रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां सीमा पर निगरानी बढ़ाने और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने में जुटी हुई हैं।
स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि फेंसिंग का कार्य पूरा होने के बाद सीमा क्षेत्र में रहने वाले हजारों परिवारों को राहत मिलेगी और लंबे समय से चली आ रही सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान हो सकेगा।
