अमेरिका द्वारा ईरानी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में अस्थायी छूट मिलने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने के बाद भारत को सस्ते ईरानी कच्चे तेल के कई प्रस्ताव मिल रहे हैं। हालांकि, रिपोर्टों के अनुसार भारत फिलहाल इन प्रस्तावों पर बड़ी खरीदारी करने के मूड में नहीं है।
भारतीय रिफाइनरियों को मिले सस्ते तेल के प्रस्ताव

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी (NIOC) और कई अंतरराष्ट्रीय बिचौलियों ने भारतीय रिफाइनरियों से संपर्क किया है। प्रस्ताव में कहा गया है कि ईरानी कच्चा तेल समान गुणवत्ता वाले अन्य मध्य-पूर्वी तेल की तुलना में प्रति बैरल 3 से 4 डॉलर तक सस्ता उपलब्ध कराया जा सकता है।
बताया गया है कि इन प्रस्तावों के साथ सिंगापुर और दुबई स्थित कई छोटी और मध्यम स्तर की ट्रेडिंग कंपनियां भी भारतीय खरीदारों से संपर्क कर रही हैं।
फिर भी भारत क्यों नहीं खरीद रहा ज्यादा तेल?

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अधिकांश रिफाइनरियां पहले ही अगस्त तक के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति सुनिश्चित कर चुकी हैं। कई देशों के साथ दीर्घकालिक अनुबंध होने और पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध होने के कारण फिलहाल अतिरिक्त खरीद की गुंजाइश सीमित है।
इसके अलावा, भारत के रणनीतिक भंडार और मौजूदा आयात व्यवस्था के चलते तत्काल बड़े पैमाने पर ईरानी तेल खरीदने की आवश्यकता नहीं मानी जा रही है।

ऊर्जा सहयोग पर हुई चर्चा
हाल ही में ईरान के पेट्रोलियम मंत्री मोहसेन पाकनेजाद की नई दिल्ली यात्रा के दौरान भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल तथा एलपीजी (LPG) की संभावित आपूर्ति को लेकर भी चर्चा हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में मांग बढ़ती है या मौजूदा अनुबंध समाप्त होते हैं, तो भारत ईरानी तेल के आयात पर फिर से विचार कर सकता है।
एलपीजी आयात बढ़ने की संभावना
भारत पहले से ही व्यापारिक कंपनियों के माध्यम से ईरान से एलपीजी आयात करता रहा है। प्रतिबंधों में ढील मिलने के बाद इस आयात में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
पहले भी मिली थी अस्थायी छूट
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के दौरान वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इसके बाद कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अमेरिका ने सीमित अवधि के लिए प्रतिबंधों में ढील दी थी।
उस दौरान भारत ने अप्रैल में ईरानी तेल की दो खेप खरीदी थीं, जिनका भुगतान चीनी युआन में किया गया था।
आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका की ओर से प्रतिबंधों में और राहत मिलती है तथा भारत के मौजूदा आयात अनुबंधों में बदलाव होता है, तो भविष्य में ईरानी तेल का आयात बढ़ सकता है। फिलहाल भारत अपनी मौजूदा ऊर्जा रणनीति और दीर्घकालिक आपूर्ति समझौतों को प्राथमिकता दे रहा है।
