अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने निवेश खातों को लेकर चर्चा में आ गए हैं। हाल ही में सामने आए वित्तीय खुलासों में पता चला है कि उनके निवेश पोर्टफोलियो में सिर्फ 90 दिनों के भीतर 3642 लेनदेन किए गए। इसका मतलब है कि औसतन हर 35 मिनट में एक सौदा हुआ। इस खुलासे के बाद अमेरिका में राजनीतिक और वित्तीय हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से मार्च 2026 के बीच ट्रंप के निवेश खातों में 212 मिलियन डॉलर से 695 मिलियन डॉलर तक के सौदे हुए। इन लेनदेन में 1000 से अधिक कंपनियां और निवेश कोष शामिल थे। कुल मिलाकर 2346 खरीद और 1296 बिक्री दर्ज की गई।
इन सौदों में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी तकनीकी कंपनियों की रही। माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न, मेटा, नेटफ्लिक्स, ओरेकल और एएमडी जैसे बड़े नाम इसमें शामिल रहे। दस्तावेजों के अनुसार केवल इन कंपनियों में करोड़ों डॉलर की खरीद-फरोख्त की गई।

मार्च महीने में लेनदेन की रफ्तार और तेज हो गई थी। एक ही दिन में सैकड़ों खरीद और बिक्री दर्ज की गईं। खासकर एनवीडिया और अन्य तकनीकी शेयरों में बड़े स्तर पर निवेश ने कई सवाल खड़े किए हैं। कुछ अमेरिकी सांसदों ने इसे संभावित अंदरूनी जानकारी के दुरुपयोग से जोड़ते हुए जांच की मांग की है।
हालांकि ट्रंप संगठन ने इन आरोपों को खारिज किया है। संगठन का कहना है कि इन निवेशों का संचालन बाहरी वित्तीय प्रबंधकों द्वारा किया गया और ट्रंप या उनके परिवार की इन फैसलों में कोई सीधी भूमिका नहीं थी। अमेरिकी वित्त मंत्री ने भी यही कहा है कि राष्ट्रपति व्यक्तिगत रूप से इन सौदों में शामिल नहीं थे।
फिलहाल यह मामला अमेरिका में नैतिकता, पारदर्शिता और सत्ता में बैठे लोगों के निवेश व्यवहार को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है। विपक्ष इसे गंभीर मुद्दा मान रहा है, जबकि ट्रंप खेमे का दावा है कि इसमें कोई नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ।


