भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अब अंतिम चरण के बेहद करीब पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच डील किसी भी समय साइन होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि अभी कुछ अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई है।
इस बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने गुरुवार को लंदन में बड़ा बयान देते हुए कहा कि बातचीत लगभग पूरी हो चुकी है। उन्होंने बताया कि 6 फरवरी से दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण शर्त अभी भी लंबित है।
टैरिफ में ‘तुलनात्मक लाभ’ की मांग
पीयूष गोयल के अनुसार भारत चाहता है कि उसके निर्यात को अमेरिकी बाजार में अन्य देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ लाभ मिले। भारत की मांग है कि उसके उत्पाद—चाहे वस्त्र हों, दवाइयां हों या इंजीनियरिंग सामान—वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में कम आयात शुल्क के दायरे में आएं।
उन्होंने साफ कहा कि जब तक भारत को यह “तुलनात्मक लाभ” नहीं मिलता, तब तक समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर संभव नहीं हैं।
अमेरिका से औपचारिक गारंटी की मांग
गोयल ने रॉयटर्स को दिए बयान में कहा कि जिस दिन अमेरिका भारत को इस तरह की टैरिफ गारंटी देने का स्पष्ट रास्ता प्रदान करेगा, उसी दिन यह डील पूरी हो जाएगी। फिलहाल दोनों देश इसी समाधान की तलाश में लगे हुए हैं।
पुराने टैरिफ ढांचे पर विवाद

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले जिन 18 प्रतिशत टैरिफ दरों पर सहमति बनी थी, वह उस समय भारत को मिलने वाले तुलनात्मक लाभ के आधार पर थी। उनका कहना है कि यदि अन्य देशों को समान या बेहतर शर्तें मिलने लगती हैं, तो भारत के लिए वह ढांचा प्रभावी रूप से अपना लाभ खो देता है।
इसी कारण भारत वर्तमान परिस्थितियों में पुराने टैरिफ ढांचे को पर्याप्त नहीं मान रहा है।

समझौते के संभावित फायदे

प्रस्तावित व्यापार समझौते में टैरिफ में कमी, मूल नियमों में सुधार, निवेश प्रावधानों में सहयोग और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की उम्मीद है।
अगर यह डील फाइनल होती है, तो दुनिया की सबसे बड़ी और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच व्यापारिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए नए बाजारों तक पहुंच के बड़े अवसर खुल सकते हैं और दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में नई मजबूती आने की संभावना है।

