बिहार के भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। मेडिकल जांच में पुष्टि हुई है कि भरत तिवारी के शरीर में कुल पांच गोलियां लगी थीं, जिनमें सभी गोलियां जांघों और पैरों के हिस्से में लगीं।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया?
फॉरेंसिक और डॉक्टरों की टीम की रिपोर्ट के अनुसार, शरीर पर पांच गोलियों के निशान पाए गए। गोलियां इन स्थानों पर लगी थीं:
पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में।
दूसरी गोली बाईं जांघ के अंदरूनी मध्य भाग में।

तीसरी गोली दाईं जांघ के अंदरूनी हिस्से में।

चौथी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से को चीरते हुए निकली।
पांचवीं गोली बाईं टांग के पिछले हिस्से में लगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केवल निचले हिस्से में गोलियां लगना जांच का अहम विषय हो सकता है। अब न्यायिक जांच टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का मिलान पुलिस के घटनाक्रम से कर रही है।
पुलिस का दावा
शाहपुर थाना पुलिस के अनुसार, 17 जून को बिलौटी गांव में भरत तिवारी को गिरफ्तार करने पहुंची टीम पर उसने अवैध हथियार से फायरिंग कर दी थी। पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई, जिसमें वह घायल हुआ और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
परिवार ने लगाया फर्जी एनकाउंटर का आरोप
दूसरी ओर, भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस के दावों को खारिज करते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है। परिवार का आरोप है कि भरत ने पहले ही हथियार डालकर आत्मसमर्पण कर दिया था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने उस पर नजदीक से गोलियां चलाईं।

परिजनों का यह भी दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो उनके आरोपों की पुष्टि करता है। हालांकि, इस वीडियो की आधिकारिक जांच अभी जारी है।
वायरल वीडियो के बाद कॉन्स्टेबल निलंबित
मामले से जुड़ा एक और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें बिहार पुलिस का कॉन्स्टेबल आशीष कुमार तिवारी कथित तौर पर अपने चचेरे भाई भरत तिवारी की मौत का बदला लेने की बात करता सुनाई दिया।
वीडियो वायरल होने के बाद बिहार पुलिस ने जांच शुरू की। पूर्वी चंपारण पुलिस ने पहले कॉन्स्टेबल को कारण बताओ नोटिस जारी किया और जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर उसे निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, आशीष कुमार तिवारी के खिलाफ पहले भी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो चुकी है। वर्ष 2023 में वरिष्ठ अधिकारियों से कथित अभद्र व्यवहार और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप लगे थे। वहीं 2024 में सर्विस पिस्टल से जुड़े एक मामले में भी उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी, जिसका मामला अभी अदालत में लंबित है।
जांच जारी
भरत तिवारी एनकाउंटर की न्यायिक जांच जारी है। अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पुलिस के दावे और वायरल वीडियो समेत सभी पहलुओं की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या पुलिस की कार्रवाई निर्धारित नियमों के अनुरूप थी।