राजधानी दिल्ली में सड़क सुरक्षा को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की हकीकत जमीन पर कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। चाहे डीडीए की योजनाबद्ध द्वारका उपनगरी हो या घनी आबादी वाला उत्तम नगर, दोनों ही इलाकों में सड़क और सर्विस लेन के बीच खड़े बिजली के खंभे और ट्रांसफार्मर अब लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। लगातार शिकायतों के बावजूद संबंधित सरकारी एजेंसियों की अनदेखी से स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
द्वारका के सेक्टर-3 में नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के सामने बनी सर्विस लेन इस समस्या की बड़ी मिसाल है। यहां सड़क के बीचों-बीच कई बिजली के खंभे खड़े हैं, जिन्होंने सड़क की चौड़ाई को काफी हद तक कम कर दिया है। इससे वाहन चालकों को हर समय दुर्घटना का डर बना रहता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन खंभों पर सुरक्षा के लिहाज से कोई रिफ्लेक्टर तक नहीं लगाए गए हैं। रात के समय अगर स्ट्रीट लाइट बंद हो जाए तो तेज रफ्तार वाहनों को ये खंभे दिखाई नहीं देते, जिससे हादसे की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। दिन में भी इनकी वजह से गाड़ियों की रफ्तार अचानक धीमी पड़ती है, जिससे ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है।
ककरौला के निवासी मुकेश का कहना है कि द्वारका की बसावट के समय से ही ये खंभे वहीं मौजूद हैं। उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि बिजली की तारों को भूमिगत किया जाए और इन खतरनाक खंभों को हटाया जाए।

उधर उत्तम नगर और नंदराम पार्क जैसे इलाकों में स्थिति और भी गंभीर है। यहां सड़क किनारे लगे भारी-भरकम ट्रांसफार्मर अब मुख्य रास्तों में बाधा बन चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 40 साल पहले जब ये कॉलोनियां विकसित हो रही थीं, तब ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। लेकिन आज आबादी और ट्रैफिक कई गुना बढ़ चुका है, जबकि ये पुराने ढांचे अब भी वहीं जमे हुए हैं।
उत्तम नगर के कई मुख्य मार्गों पर ट्रांसफार्मर फुटपाथ की जगह घेर चुके हैं, जिससे पैदल चलने वालों को सड़क पर उतरना पड़ता है। इससे दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि प्रशासन जल्द इन बिजली ढांचों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करे, ताकि सड़कें सुरक्षित और सुगम बन सकें।



