पश्चिम एशिया का रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट और ओमान की खाड़ी इन दिनों भारतीय नाविकों के लिए अत्यंत जोखिमभरा बनता जा रहा है। बीते 72 घंटों के भीतर ऐसे तीन जहाज हमले की चपेट में आए हैं, जिन पर भारतीय नागरिक सवार थे। इन घटनाओं ने समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे गंभीर घटना 10 जून को सामने आई, जब ओमान तट के पास एक तेल टैंकर पर हुए हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। इस घटना ने भारत समेत अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय को झकझोर दिया है। विदेश मंत्रालय ने भी इस मामले पर चिंता जताते हुए स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है।
इससे पहले 8 जून को ओमान के दक्षिण-पूर्वी तट के पास एक अन्य टैंकर पर हमला हुआ था। अमेरिकी नौसेना ने उस जहाज को मिसाइल से निशाना बनाया था। जहाज पर 24 भारतीय क्रू सदस्य मौजूद थे। हालांकि इस हमले में किसी भारतीय के हताहत होने की खबर नहीं आई, लेकिन जहाज को गंभीर नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई।
इसके अगले ही दिन एक और तेल टैंकर पर कार्रवाई की गई। इस दौरान जहाज पर मौजूद 24 भारतीयों में से 21 को सुरक्षित निकाल लिया गया, लेकिन तीन भारतीय लापता हो गए थे, जिनकी बाद में मौत की पुष्टि हुई। यह घटना भारतीय समुद्री समुदाय के लिए बेहद चिंताजनक मानी जा रही है।
तीसरी घटना 11 जून को सामने आई, जब ओमान के पास एक और जहाज संकट में फंस गया। भारतीय दूतावास और विदेश मंत्रालय की मदद से वहां बचाव अभियान चलाया गया और जहाज पर सवार 21 भारतीयों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि लगातार तीन दिनों में भारतीय क्रू वाले जहाजों से जुड़ी घटनाओं ने खतरे की गंभीरता को उजागर कर दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि ये जहाज भारतीय स्वामित्व वाले नहीं थे, बल्कि विदेशी झंडे के तहत संचालित हो रहे थे। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि इन घटनाओं में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई शामिल थी।
शिपिंग मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में इस पूरे क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले 13 जहाजों पर 562 भारतीय नाविक मौजूद हैं। इनमें से 329 नाविक होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिमी हिस्से में और बाकी पूर्वी हिस्से में तैनात हैं। इसके अलावा विदेशी झंडे वाले जहाजों पर लगभग 18,000 भारतीय नाविक इस समुद्री क्षेत्र में काम कर रहे हैं।
अमेरिकी सेना का दावा है कि इन जहाजों पर कार्रवाई इसलिए की गई क्योंकि वे कथित तौर पर ईरानी तेल या प्रतिबंधित माल के परिवहन में शामिल थे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि चेतावनी और निर्देशों की अनदेखी के बाद सैन्य कार्रवाई की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा अमेरिका-ईरान तनाव का सबसे बड़ा असर समुद्री व्यापार और अंतरराष्ट्रीय नौवहन पर पड़ रहा है। हालांकि कूटनीतिक टकराव दोनों देशों के बीच है, लेकिन इसकी कीमत आम नागरिकों और नाविकों को चुकानी पड़ रही है।

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में गिना जाता है। ऐसे में यहां बढ़ते सैन्य तनाव और लगातार हो रही कार्रवाइयों ने वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा को नई चुनौती के सामने खड़ा कर दिया है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा अब भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए एक गंभीर प्राथमिकता बन गई है।


