दुनिया के दो अलग-अलग हिस्सों में कुछ ही घंटों के अंतराल पर आए भूकंपों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। क्यूबा और ईरान में आए भूकंप के झटकों ने स्थानीय आबादी को घरों से बाहर निकलने पर मजबूर कर दिया। हालांकि राहत की बात यह रही कि दोनों देशों से अब तक किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, सोमवार देर रात क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के निकट 6.1 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह क्षेत्र में पिछले कई दशकों के दौरान आए सबसे मजबूत भूकंपों में से एक माना जा रहा है। भूकंप का केंद्र मंटुआ क्षेत्र से लगभग 104 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम में और करीब 26 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।
भूकंप के झटके केवल क्यूबा तक सीमित नहीं रहे। कैरिबियाई क्षेत्र के अलावा अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य और मैक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप के कई इलाकों में भी कंपन महसूस किया गया। कैंकुन, प्लाया डेल कारमेन और टुलम जैसे शहरों में लोगों ने झटकों के बाद एहतियातन इमारतें खाली कर दीं। स्थानीय प्रशासन ने भी कई क्षेत्रों में आपातकालीन सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए।
भूकंप विशेषज्ञों के अनुसार यह घटना इसलिए भी असामान्य मानी जा रही है क्योंकि इसका केंद्र किसी प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट सीमा पर नहीं था। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के शक्तिशाली भूकंप आमतौर पर प्लेटों की सीमाओं पर आते हैं, जबकि यह झटका प्लेट के अंदरूनी हिस्से में उत्पन्न हुआ। ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, इस क्षेत्र में लगभग डेढ़ सदी पहले इसी तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि झटके काफी तेज थे और कई लोगों ने पहली बार इतनी तीव्रता का कंपन महसूस किया। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं पाया गया और कोई चेतावनी जारी नहीं की गई।

उधर, मंगलवार तड़के ईरान के दक्षिणी होर्मोजगान प्रांत में भी 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप का केंद्र सरगाज क्षेत्र के निकट लगभग 22 किलोमीटर की गहराई में था। प्रारंभिक आकलन में किसी बड़े नुकसान या हताहत की जानकारी सामने नहीं आई है।
ईरान भूकंपीय दृष्टि से दुनिया के सबसे संवेदनशील देशों में गिना जाता है। कई सक्रिय फॉल्ट लाइनों पर स्थित होने के कारण यहां समय-समय पर मध्यम और बड़े भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञ लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी संभावित आफ्टरशॉक या अन्य जोखिम का समय रहते पता लगाया जा सके।
गौरतलब है कि हाल के दिनों में एशिया और प्रशांत क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियां बढ़ी हुई दिखाई दे रही हैं। इससे पहले फिलीपींस में भी शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया था, जबकि भूटान में आए झटकों का असर भारत के पूर्वोत्तर राज्यों, नेपाल और चीन के कुछ हिस्सों तक महसूस किया गया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्कता और मजबूत आपदा प्रबंधन व्यवस्था ही संभावित नुकसान को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है।

