भारतीय शेयर बाजार नियामक SEBI ने देश की प्रमुख स्वर्ण निर्यातक कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। सेबी ने कंपनी और उसके चेयरमैन एवं प्रमोटर राजेश मेहता को अंतरिम आदेश के तहत शेयर बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है। नियामक का आरोप है कि कंपनी ने वित्तीय वर्षों FY21 से FY25 के बीच लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के राजस्व (Revenue) को गलत तरीके से दर्शाया, जिसकी पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
राजेश एक्सपोर्ट्स लंबे समय से भारत की प्रमुख ज्वेलरी और गोल्ड रिफाइनिंग कंपनियों में गिनी जाती रही है। कंपनी का कारोबार दुनिया भर में फैला हुआ है और इसके राजस्व के आंकड़े अक्सर देश की सबसे बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों में इसकी गिनती करवाते रहे हैं। हालांकि अब कंपनी पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, जिससे निवेशकों और बाजार में चिंता बढ़ गई है।
SEBI द्वारा 3 जून को जारी अंतरिम आदेश के अनुसार, कंपनी की विदेशी सहायक इकाइयों से जुड़े राजस्व आंकड़ों में बड़े पैमाने पर विसंगतियां पाई गई हैं। नियामक का मानना है कि लगभग ₹15.15 लाख करोड़ के कथित राजस्व को सत्यापित नहीं किया जा सका है। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन आंकड़ों का उपयोग शेयर बाजार में निवेशकों को प्रभावित करने और कंपनी की वित्तीय स्थिति को वास्तविकता से अधिक मजबूत दिखाने के लिए किया गया हो सकता है।
यह मामला मार्च 2024 में एक शेयरधारक की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत में कंपनी की असामान्य रूप से बड़ी बकाया राशियों और लंबे समय तक लंबित भुगतानों पर सवाल उठाए गए थे। शिकायत मिलने के बाद SEBI ने जांच शुरू की और अक्टूबर 2024 में विशेष जांच टीम गठित की। बाद में फोरेंसिक ऑडिट के लिए बीडीओ (BDO) को नियुक्त किया गया, जिसने कंपनी के खातों और वित्तीय खुलासों की विस्तृत समीक्षा की।

हालांकि SEBI का यह आदेश अभी अंतरिम है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन आरोपों की गंभीरता ने बाजार में हलचल मचा दी है। ₹15.15 लाख करोड़ की राशि कई देशों की वार्षिक अर्थव्यवस्था से भी बड़ी बताई जा रही है, जिससे यह मामला हाल के वर्षों के सबसे बड़े कॉर्पोरेट विवादों में शामिल हो गया है।

कार्रवाई की खबर सामने आते ही निवेशकों में घबराहट देखने को मिली। राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में भारी बिकवाली हुई और स्टॉक लोअर सर्किट में पहुंच गया। कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5 प्रतिशत गिरकर ₹103.92 के स्तर पर आ गया।
यह मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस, वित्तीय पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर रहा है। अब बाजार की नजर SEBI की आगे की जांच और अंतिम रिपोर्ट पर बनी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोप कितने सही हैं और कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति क्या है।

नोट: शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

