देश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) के बढ़ते उपयोग के बीच गैस कनेक्शन से जुड़े नियमों में बदलाव की चर्चा तेज हो गई है। सरकार और तेल कंपनियां उन उपभोक्ताओं की पहचान कर रही हैं जो एक ही पते पर PNG और LPG दोनों सुविधाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जानकारी के अनुसार, जिन क्षेत्रों में PNG की सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे पाइप्ड गैस अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग PNG कनेक्शन लेने के बाद भी LPG सिलेंडर का उपयोग जारी रखे हुए हैं, जिससे आपूर्ति प्रबंधन प्रभावित हो रहा है।

तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू गैस के दुरुपयोग, जमाखोरी और अनियमितताओं को रोकने के लिए अपने डेटाबेस को अपडेट करना शुरू कर दिया है। इसी प्रक्रिया के तहत ऐसे उपभोक्ताओं की निगरानी की जा रही है जिनके नाम पर दोनों प्रकार के कनेक्शन सक्रिय हैं।
नए प्रावधानों के अनुसार, PNG उपलब्ध होने वाले क्षेत्रों में कुछ उपभोक्ताओं को LPG कनेक्शन सरेंडर करने या निष्क्रिय करने के लिए कहा जा सकता है। हालांकि, जरूरत पड़ने पर भविष्य में LPG कनेक्शन दोबारा सक्रिय कराने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी, विशेषकर उन इलाकों में जहां PNG सेवा उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा गैस सिलेंडर बुकिंग से जुड़े नियमों में भी बदलाव किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में LPG रिफिल की न्यूनतम अवधि बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए यह अवधि 45 दिन तक हो सकती है। इसका उद्देश्य गैस की उपलब्धता को बेहतर बनाना और अनावश्यक बुकिंग को रोकना है।
सब्सिडी व्यवस्था में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। पात्र परिवारों को पहले की तरह निर्धारित संख्या में रियायती सिलेंडर मिलते रहेंगे। वहीं अतिरिक्त सिलेंडरों के लिए बाजार दर के अनुसार भुगतान करना होगा।
उपभोक्ताओं को सलाह दी जा रही है कि वे अपने गैस प्रदाता से संपर्क कर नवीनतम नियमों की पुष्टि करें और किसी भी कार्रवाई से पहले आधिकारिक सूचना का इंतजार करें।

