नेपाल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने 1 से 5 जून तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। हाल ही में हुए चुनावों में बड़ी जीत हासिल कर सत्ता में आई आरएसपी के प्रमुख के रूप में यह उनकी महत्वपूर्ण विदेश यात्राओं में से एक मानी जा रही है।
आरएसपी और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य दोनों राजनीतिक दलों के बीच संवाद को मजबूत करना, संगठनात्मक अनुभव साझा करना और नेपाल-भारत संबंधों को नई दिशा देना है। भारत पहुंचने पर रवि लामिछाने और उनके प्रतिनिधिमंडल का भाजपा मुख्यालय में स्वागत किया जाएगा।
यात्रा के दौरान उनकी भाजपा नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें प्रस्तावित हैं। दोनों पक्ष लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, संगठन निर्माण, जनसंपर्क मॉडल और द्विपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे। इसे नेपाल और भारत के राजनीतिक दलों के बीच नए संवाद की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।
कार्यक्रम के तहत भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ भी रवि लामिछाने की मुलाकात निर्धारित है। माना जा रहा है कि इस दौरान दोनों देशों के संबंधों, क्षेत्रीय सहयोग और आपसी साझेदारी को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी।
सूत्रों के अनुसार, भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी उनकी मुलाकात प्रस्तावित है। हालांकि बैठक के समय और स्थान को लेकर आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में इस बैठक को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों के अलावा रवि लामिछाने भारत में रह रहे नेपाली समुदाय, पार्टी समर्थकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। उनके सम्मान में नागरिक अभिनंदन और अन्य विशेष कार्यक्रमों का आयोजन भी किया गया है।
धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत रवि लामिछाने अयोध्या का भी दौरा करेंगे, जहां वे रामलला के दर्शन करेंगे। इस दौरान नेपाली समुदाय और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उनका स्वागत किए जाने की संभावना है।
इस प्रतिनिधिमंडल में उनकी पत्नी निकिता पौडेल, पार्टी के वरिष्ठ नेता, सांसद और अन्य अधिकारी भी शामिल हैं। नई दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास पूरे दौरे के समन्वय में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा नेपाल और भारत के बीच राजनीतिक, सांस्कृतिक और जनस्तरीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से मौजूद ऐतिहासिक और सामाजिक संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।



