भोपाल की चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में जांच तेज हो गई है। इस हाई-प्रोफाइल केस की जांच कर रही Central Bureau of Investigation (CBI) ने हाईकोर्ट में कहा है कि आरोपी सास Giribala Singh से हिरासत में पूछताछ जरूरी है। जांच एजेंसी ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग भी की है। मामले में अदालत ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से जुड़ी अहम जानकारियां कोर्ट के सामने रखीं। सरकारी पक्ष ने बताया कि ट्विशा शर्मा के शरीर पर कलाई, कोहनी, सिर और अन्य हिस्सों में चोटों के निशान मिले थे। अदालत ने पूछा कि क्या ये चोटें मौत से पहले की थीं? इस पर राज्य सरकार ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार कई चोटें “एंटी-मॉर्टम” यानी मौत से पहले की थीं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि ये चोटें न तो शव को नीचे उतारने के दौरान लग सकती थीं और न ही मौत के बाद की प्रतीत होती हैं। सरकारी वकील के मुताबिक, चोटों की प्रकृति किसी संघर्ष या हाथापाई की ओर इशारा करती है।

मामले में ट्विशा शर्मा की बहन का बयान भी अदालत में पढ़कर सुनाया गया। बयान के अनुसार, ट्विशा की सास ने उसे घर बुलाकर कथित तौर पर 2 लाख रुपये की मांग की थी। यह भी आरोप लगाया गया कि शादी में खर्च की गई रकम को लेकर ट्विशा और उसके परिवार को अपमानित किया गया।

इस मामले में दहेज प्रताड़ना और उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं और दहेज निषेध अधिनियम के तहत FIR दर्ज की है। इस एफआईआर में ट्विशा के पति समर्थ सिंह और उनकी मां Giribala Singh को आरोपी बनाया गया है।
वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में कहा कि गिरिबाला सिंह ने जांच में पूरा सहयोग किया है। उनके वकील ने बताया कि ट्विशा को फंदे से लटकने की सूचना मिलने के करीब 20 मिनट के भीतर AIIMS भोपाल पहुंचा दिया गया था और उन्होंने जब्ती मेमो पर भी हस्ताक्षर किए थे।
बचाव पक्ष का कहना है कि उन्हें जांच एजेंसियों के नोटिसों की जानकारी समय पर नहीं मिली और यह कहना गलत है कि उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया। दूसरी ओर राज्य सरकार ने दावा किया कि नोटिस भेजे जाने के बावजूद गिरिबाला सिंह जांच के दौरान उपलब्ध नहीं थीं।
सरकार ने अदालत से कहा कि जमानत की शर्तों में जांच में सहयोग और सबूतों से छेड़छाड़ न करने जैसी बातें शामिल थीं। साथ ही यह भी कहा गया कि आरोपी पक्ष द्वारा ट्विशा शर्मा पर लगाए गए कुछ आरोपों ने जांच एजेंसियों के संदेह को और बढ़ाया है।
यह मामला अब लगातार कानूनी और सामाजिक बहस का विषय बना हुआ है। हाईकोर्ट के आगामी फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

