पश्चिमी दिल्ली में उद्योगपति से 5 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के हाई-प्रोफाइल मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में Delhi Police के एक सब-इंस्पेक्टर की भूमिका सामने आई है। आरोप है कि पश्चिमी दिल्ली पुलिस उपायुक्त के पीए के तौर पर तैनात एसआई प्रदीप कुमार रांगी ही इस पूरी रंगदारी साजिश का मास्टरमाइंड था।
मामला गैंगस्टर Lawrence Bishnoi गैंग के नाम पर उद्योगपति को धमकाकर रंगदारी मांगने से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, उद्योगपति से 5 करोड़ रुपये की मांग की गई थी और रोहिणी इलाके में 2 करोड़ रुपये की वसूली भी कर ली गई थी।
बताया गया कि 16 अप्रैल को उद्योगपति को एक अंतरराष्ट्रीय नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई थी। कॉल करने वाले ने खुद को गैंग का सदस्य बताते हुए प्रोटेक्शन मनी मांगी और रकम नहीं देने पर जान से मारने की धमकी दी। बाद में उद्योगपति को रोहिणी स्थित काली माता मंदिर के पास बुलाया गया, जहां नकाबपोश युवक के जरिए नकदी ले ली गई।
जब आरोपियों ने बाकी रकम के लिए दोबारा दबाव बनाया, तब पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच के दौरान तकनीकी सर्विलांस और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर पुलिस ने पहले प्रदीप रांगी के करीबी सहयोगी को पकड़ा और फिर इस नेटवर्क से जुड़े छह लोगों को गिरफ्तार किया।
सूत्रों के मुताबिक, साथियों की गिरफ्तारी की जानकारी मिलने के बाद एसआई प्रदीप रांगी कथित तौर पर वसूले गए 2 करोड़ रुपये लेकर फरार हो गया। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने झज्जर कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने उसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मामले में करोड़ों रुपये की बरामदगी और पूरे नेटवर्क का खुलासा करने के लिए आरोपी से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी माना कि आरोपी की भूमिका केवल सहायक की नहीं बल्कि सक्रिय साजिशकर्ता की प्रतीत होती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आरोपी और रंगदारी नेटवर्क के बीच सीधा संबंध है।

फिलहाल मामले को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पुलिस फरार एसआई की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है और पूरे नेटवर्क की जांच जारी है।

