देश में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार अब एक्शन मोड में आ गई है। सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई एक विस्तृत रिपोर्ट में सरकार ने बताया है कि इस तरह के अपराधों से निपटने के लिए बहु-स्तरीय रणनीति तैयार की गई है, जिसमें टेलीकॉम, बैंकिंग और टेक प्लेटफॉर्म्स सभी को शामिल किया गया है।

गृह मंत्रालय के तहत काम करने वाले Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि अब सिम कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को और सख्त किया जाएगा। इसके तहत नए सिम लेने के लिए बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य किया जा सकता है, ताकि फर्जी सिम कार्ड के जरिए होने वाले अपराधों को रोका जा सके। साथ ही पहले से सक्रिय संदिग्ध और फर्जी सिम नंबरों को बंद करने की भी तैयारी की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठ लेते हैं। इस तरह के मामलों में बढ़ोतरी को देखते हुए सरकार ने टेलीकॉम विभाग, Reserve Bank of India (RBI), जांच एजेंसियों और टेक कंपनियों के साथ मिलकर समन्वित कार्रवाई शुरू की है।

इसी कड़ी में WhatsApp ने भी बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 12 हफ्तों में व्हॉट्सएप ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम से जुड़े करीब 9,400 अकाउंट्स को बैन किया है। इसके अलावा प्लेटफॉर्म अब ऐसे अकाउंट्स की पहचान करने पर भी काम कर रहा है, जो पुलिस या सरकारी लोगो का गलत इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करते हैं।
सरकार की योजना है कि आने वाले समय में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे संदिग्ध अकाउंट्स को तेजी से चिन्हित कर कार्रवाई की जाए। साथ ही आम लोगों को भी जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जाएंगे, ताकि वे इस तरह के फर्जी कॉल या मैसेज से सतर्क रह सकें।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों से निपटने के लिए तकनीकी सख्ती के साथ-साथ जनजागरूकता भी उतनी ही जरूरी है। ऐसे में सरकार के ये कदम आने वाले समय में साइबर फ्रॉड पर रोक लगाने में अहम साबित हो सकते हैं।