नोएडा में हुए हिंसक प्रदर्शन को लेकर जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं।

इस पूरे मामले में अब एक बड़ा सुराग हाथ लगा है—एक डायरी, जिसने पूरे घटनाक्रम की परतें खोलनी शुरू कर दी हैं।

पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स की जांच में सामने आया है कि दिल्ली से गिरफ्तार आरोपी हिमांशु ठाकुर के घर से एक डायरी बरामद हुई है।

इस डायरी में सिर्फ नोट्स नहीं थे… बल्कि नोएडा में हुई हिंसा का पूरा “ब्लूप्रिंट” लिखा हुआ था।
यानी, यह कोई अचानक भड़का हुआ प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसके पीछे पहले से बनाई गई एक सोची-समझी योजना थी।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस डायरी में न सिर्फ नोएडा बल्कि देश के कई अन्य राज्यों में संभावित आंदोलनों का भी जिक्र किया गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क एक बड़े स्तर पर काम कर रहा था।
इस पूरे मामले में एक और बड़ा खुलासा हुआ है—छात्रों का ब्रेनवॉश।
एसटीएफ के अनुसार, हिमांशु और उसके साथी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों को अपने विचारों से प्रभावित करते थे। खासकर दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थानों को टारगेट किया गया।
बताया जा रहा है कि ये लोग छात्रों को धीरे-धीरे अपने संपर्क में लेते थे, उन्हें आंदोलनों के लिए तैयार करते थे और फिर अलग-अलग शहरों में होने वाले प्रदर्शनों में शामिल करवाते थे।
नोएडा में हुए प्रदर्शन में भी कई छात्र इसी तरह जोड़े गए थे।
इस केस में पहले ही आदित्य आनंद को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया जा चुका है, जिसे इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। उसी की पूछताछ के बाद हिमांशु ठाकुर तक पुलिस पहुंची।
जांच में यह भी सामने आया है कि हिमांशु “मजदूर बिगुल दस्ता” नाम के संगठन से जुड़ा हुआ था और उसी के जरिए लोगों को संगठित करने का काम करता था।
अब सवाल ये उठता है—क्या यह सिर्फ एक शहर तक सीमित मामला है, या फिर इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है?
फिलहाल, एजेंसियां इस डायरी के हर पन्ने को खंगाल रही हैं, क्योंकि इसमें छिपी जानकारी आगे और बड़े खुलासे कर सकती है।
एक बात साफ है—नोएडा हिंसा अब सिर्फ एक घटना नहीं रही, बल्कि एक सुनियोजित नेटवर्क की कहानी बनती जा रही है।