केरल में बीडीएस छात्र की मौत के मामले ने बड़ा मोड़ ले लिया है। पुलिस ने एक ऑनलाइन लोन ऐप के खिलाफ जबरन वसूली, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने के आरोप में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कर्ज वसूली के नाम पर छात्र को लगातार परेशान किया गया, जिसके बाद उसकी मौत हो गई।

7

मृतक छात्र की पहचान 22 वर्षीय नितिन राज के रूप में हुई है, जो केरल के एक निजी डेंटल कॉलेज में बीडीएस प्रथम वर्ष का छात्र था। पुलिस के मुताबिक, छात्र ने जनवरी में एक ऑनलाइन लोन ऐप से 15,000 रुपये का कर्ज लिया था। आरोप है कि उस पर 36 प्रतिशत ब्याज लगाया गया और बाद में रिकवरी एजेंट्स लगातार फोन कर धमकाने लगे।

एफआईआर के अनुसार, 9 अप्रैल से छात्र को बार-बार कॉल कर पैसे लौटाने का दबाव बनाया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि वसूली के दौरान मानसिक दबाव और प्रताड़ना की गई।
10 अप्रैल को छात्र गंभीर हालत में एक इमारत के नीचे घायल मिला, बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार और छात्रों ने न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन किया।
इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की जबरन वसूली से जुड़ी धाराओं, केरल साहूकार कानून और अत्यधिक ब्याज वसूली रोकथाम कानून के तहत केस दर्ज किया है। साइबर सेल भी जांच में जुटी है।
मामले में एक और गंभीर एंगल सामने आया है। छात्र के साथ कथित तौर पर जाति और रंग के आधार पर भेदभाव किए जाने के आरोप लगे हैं। इस संबंध में कॉलेज के दो शिक्षकों पर आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद कॉलेज प्रशासन ने एक विभागाध्यक्ष को बर्खास्त कर दिया है। वहीं राज्य मानवाधिकार आयोग, एससी/एसटी आयोग और अन्य संस्थाएं भी मामले की अलग-अलग जांच कर रही हैं।
यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन लोन ऐप्स की मनमानी, ऊंचे ब्याज और धमकी भरे रिकवरी सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।