अरामको के CEO का दावा—अगर संघर्ष लंबा चला तो तेल बाजार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा बड़ा असर

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। Saudi Aramco के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Amin H. Nasser ने दावा किया है कि ईरान से जुड़े संघर्ष के कारण अब तक करीब 180 मिलियन बैरल कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हो चुकी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर Iran और Israel के बीच जारी तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अर्थव्यवस्था पर और गंभीर हो सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ा खतरा
इस संकट के बीच ईरान ने संकेत दिया है कि वह Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति को रोक सकता है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 17% कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
इस रास्ते से निकलने वाला ज्यादातर तेल एशियाई देशों तक पहुंचता है, इसलिए यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण हाल ही में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
रिपोर्ट्स के अनुसार Brent Crude की कीमत पिछले सत्र में लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो तीन साल का उच्चतम स्तर है। हालांकि बाद में इसमें कुछ गिरावट दर्ज की गई।
पाइपलाइन बना वैकल्पिक रास्ता
अरामको के CEO अमीन नासिर के मुताबिक अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आती है तो कंपनी के पास ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन एक प्रमुख विकल्प है।
यह पाइपलाइन देश के पूर्वी हिस्से के ऑयल फील्ड से तेल को लाल सागर के तट तक पहुंचा सकती है और इससे रोजाना करीब 7 मिलियन बैरल तेल भेजा जा सकता है।
ट्रंप के बयान से बाजार को राहत
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा है कि ईरान से जुड़ा संघर्ष जल्द समाप्त हो सकता है।
उनके इस बयान के बाद वैश्विक तेल बाजार में कुछ राहत देखने को मिली और कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इससे तेल की आपूर्ति बाधित हो सकती है और दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतें बढ़ सकती हैं।
इसका असर वैश्विक व्यापार, परिवहन और उद्योगों पर भी पड़ सकता है।