भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को एक बार फिर भारी बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के दौरान BSE सेंसेक्स 1,147 अंक से अधिक फिसलकर 71,333.14 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि NSE निफ्टी50 भी 390 अंक से ज्यादा गिरकर 22,230.05 पर आ गया। हालांकि बाद में बाजार ने कुछ नुकसान की भरपाई की। कारोबार खत्म होने पर सेंसेक्स 570.59 अंक गिरकर 71,909.70 और निफ्टी करीब 200 अंक की गिरावट के साथ 22,421 के आसपास बंद हुआ। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी दबाव रहा। इंडिया VIX करीब 13.82 प्रतिशत बढ़कर 15.36 पर पहुंच गया।
बाजार में गिरावट के बीच BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी प्रभावित हुआ। कारोबारी सत्र के दौरान इसमें करीब 10 लाख करोड़ रुपये की कमी आई, हालांकि बाद में रिकवरी के चलते कुल नुकसान लगभग 6 लाख करोड़ रुपये तक सीमित रहा। बाजार में बिकवाली के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार निकासी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और रुपये की कमजोरी ने निवेशकों पर दबाव बढ़ाया।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली से दबाव
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली भारतीय बाजार के लिए बड़ी चिंता बनी हुई है। 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने 10,148 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर बेचे। सितंबर के अंतिम दो कारोबारी सत्रों में उनकी कुल बिकवाली 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार को कुछ सहारा दिया और बुधवार को करीब 11,271 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल ने बढ़ाई चिंता
अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के कारण वहां के निवेश विकल्प विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक हो रहे हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया। ब्रेंट क्रूड की दिसंबर डिलीवरी की कीमत कारोबार के दौरान 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई। भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और चालू खाते से जुड़े दबाव को बढ़ा सकता है।
डॉलर के मुकाबले रुपया 96 के पार

रुपये में भी कमजोरी जारी रही। गुरुवार को भारतीय मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.19 के निचले स्तर तक पहुंच गई। बाजार में विदेशी फंडों की निकासी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को रुपये पर दबाव के प्रमुख कारणों में गिना जा रहा है। निवेशकों की नजर अब विदेशी पूंजी के प्रवाह, तेल की कीमतों और वैश्विक बाजारों के अगले रुख पर रहेगी।
नोट: किसी भी शेयर में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।




