मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने प्रदर्शन शुरू किया है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार चाहे उन्हें तीन दिन के बजाय तीन महीने के लिए जेल भेज दे, लेकिन उनका आंदोलन जारी रहेगा। CJP ने 2 अक्टूबर से मुंबई में प्रदर्शन शुरू करने और इसके बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन फैलाने की घोषणा की थी।
दिपके ने मुंबई प्रेस क्लब में कहा कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद संगठन अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेगा। CJP मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के साथ चुनाव आयोग में नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने और नागरिक समाज की भागीदारी की मांग कर रही है। संगठन ने मतदाता सूची में बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं और 2025 की मतदाता सूची को आधार बनाए रखने की मांग की है।
‘तीन दिन नहीं, तीन महीने जेल में डालो’
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने कहा कि अगर सरकार उन्हें तीन महीने तक जेल में रखना चाहती है तो भी वह इसके लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि हिरासत या गिरफ्तारी की कार्रवाई से CJP का विरोध समाप्त नहीं होगा।
मुंबई पुलिस ने पहले शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर के प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बाद दिपके ने ‘जेल भरो आंदोलन’ की घोषणा की थी। 2 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने शिवाजी पार्क में अनुमति नहीं मिलने के बाद एक खड़े ट्रक को अस्थायी मंच के रूप में इस्तेमाल कर प्रदर्शन किया।
मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल
दिपके ने मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर बदलाव को लेकर सवाल उठाए और दावा किया कि इससे बड़ी संख्या में मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, 13 करोड़ वोट हटाए जाने का आंकड़ा CJP और विपक्ष की ओर से किए गए दावों से जुड़ा है, इसे स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। चुनाव आयोग और सरकार ने मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया और उससे जुड़े आरोपों पर अपना पक्ष रखा है।
CJP का कहना है कि महाराष्ट्र में चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुके हैं। संगठन ने मुंबई के बाद गोवा, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड समेत अन्य राज्यों में प्रदर्शन करने की योजना बताई है। मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में अक्टूबर के अंत से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आंदोलन करने की भी घोषणा की गई है।







